56. राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने के लिए नहीं होतीं अपितु लोगों को शिक्षित, जागरूक और संगठित करने के लिए होती हैं। - Page 449

432 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. श्री हरदास अशारवर (विंध्य प्रदेश)

  2. श्री जी.टी. परमार (गुजरात)

  3. श्री वी.के. गायकवाड (महाराष्ट्र)

  4. श्री ए.जी. पवार (महाराष्ट्र)

  5. श्री वी. दोरास्वामी (मैसूर)

  6. श्री एम.जी. वेलू (मद्रास)

  7. श्री डब्ल्यू.एस. काम्बले (बेरार)

डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ‘‘दोस्तों, हम काफी समय बाद मिल रहे हैं। यह बैठक पहले नहीं हो पाई इसके अनेक कारण हैं। जहाँ तक मेरा संबंध है, आप जानते हैं कि मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है। मैंने नोट किया है कि आपने अनुसूचित जाति संघ के कार्य को मेरे बिना आगे बढ़ाना नहीं सीखा है। समय आ गया है कि यदि मैं उपस्थित न भी रहूँ तो भी आप कार्य को आगे बढ़ाने में समर्थ हों। मैं एक प्रकार से परामर्शदाता के रूप में रहूँगा। जब कोई कठिनाई हो आप मुझसे किसी भी समय परामर्श ले सकते हैं।’’ इन प्रारम्भिक शब्दों के साथ कुछ संकल्पों पर विचार-विमर्श किया गया।

संकल्प सं. 1ः कार्यकारिणी समिति की यह बैठक पिछली कार्यकारिणी समिति द्वारा डॉ. बाबा साहब उर्फ डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के संघ के अध्यक्ष के रूप में चयन की पुष्टि करती है।

प्रस्ताव कर्त्ता : ए. रत्नम (मद्रास)

अनुमोदन कर्त्ता : जी.सी. अरुमुगम

समर्थन कर्त्ता : बी.के. गायकवाड़

संकल्प को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर : यहाँ कुछ पुराने सदस्य हैं, जिन्होंने अपने कुछ संदेह

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व्यक्त किये हैं कि क्या अनुसूचित जाति संघ को जारी रहना चाहिए या नहीं। लेकिन मेरा विचार है कि जब तक अस्पृश्यता की समस्या रहेगी तब तक अनुसूचित जाति संघ कार्य करना जारी रखे। यह प्रश्न उठ सकता है कि क्या हम चुनाव के समय किसी अन्य पार्टी के सहयोग से कार्य कर सकते हैं। लेकिन आप जानते हैं कि जब हमने अन्य पार्टियों के सहयोग से कार्य किया तो हमारा अनुभव क्या रहा। लेकिन