56. राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने के लिए नहीं होतीं अपितु लोगों को शिक्षित, जागरूक और संगठित करने के लिए होती हैं। - Page 450

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ऐसे प्रश्न पर उचित समय पर विचार किया जाएगा। फिलहाल हम अनुसूचित जाति संघ को जारी रखने के प्रश्न पर विचार करते हैं।

संकल्प सं. 2 : अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ की कार्यकारिणी समिति, संघ की पिछले चुनाव में हुई हार से अवगत है। लेकिन कार्यकारिणी समिति किसी भी रूप में इससे हतोत्साहित नहीं है। ऐसी हारें सामान्य रूप से एवं प्रायः होती रहती हैं। राजनीतिक दल केवल चुनाव जीतने के लिए ही नहीं बनता है। राजनीतिक पार्टी नागरिकों को शिक्षित, जागरूक एवं संगठित करने के लिए बनती है। संघ ने इस कार्य को निस्संदेह अच्छी तरह एवं अपेक्षा से बढ़कर किया है।

इस बैठक में कार्यकारिणी समिति दृढ़ता से यह व्यक्त करती है कि अनुसूचित जाति संघ तब तक बन्द नहीं होगा जब तक अस्पृश्यता के कारण उठने वाली समस्याओं का हल नहीं हो जाता।

प्रस्ताव कर्त्ता : श्री एच.डी. एवाडे

अनुमोदन कर्त्ता : श्री एम.जे. वेलू

संकल्प को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।

संकल्प सं. 3 : ‘‘अनुसूचित जाति संघ की कार्यकारिणी ने इस बैठक में खेद

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व्यक्त किया कि अनुसूचित जाति संघ को अखिल भारतीय पार्टी घोषित न करके चुनाव आयोग ने गलत किया। पार्टी अखिल भारतीय पार्टी है या नहीं, इसका निर्धारण उसके पक्ष में डाले गये मतों की संख्या से न कि उसके द्वारा जीती गई सीटों के आधार पर होना चाहिए। डाले गये कुल मतों की संख्या की गणना करते समय चुनाव आयोग इस बात पर विचार न कर सका कि अनुसूचित जाति संघ और सोशलिस्ट पार्टी के मध्य चुनाव समझौता होने के कारण अनुसूचित जाति के मतदाताओं ने दूसरा मत सोशलिस्ट पार्टी के पक्ष में डाला जब कि सोशलिस्ट पार्टी के मतदाताओं ने अनुसूचित जाति के प्रत्याशी को मत नहीं दिया। यदि अनुसूचित जाति के मतदाताओं द्वारा सोशलिस्ट प्रत्याशी के पक्ष में डाले गये मतों को अनुसू­ चित जाति मतदाताओं द्वारा अनुसूचित जाति के पक्ष में डाले गये मतों में जोड़ दिया जाए तो संघ द्वारा डाले गये मतों की संख्या सोशलिस्ट पार्टी द्वारा डाले गये मतों से बहुत अधिक होती।’’

अतः कार्यकारिणी समिति चुनाव आयोग से अनुरोध करती है कि पार्टी के अखिल भारतीय पार्टी के दर्जे को बहाल किया जाए जो कि इसे प्रथम चुनाव के समय दिया गया था।