436 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
संकल्प को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
संकल्प सं. 6ः कार्यकारिणी समिति की इस बैठक में यह राय बनी है कि संसद
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में, राज्य विधानसभाओं में, नगरपालिकाओं में और जिला व स्थानीय बोर्डों में अनुस ूचित जाति के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान तत्काल अगले चुनावों से पूर्व समाप्त किया जाए।’’
प्रस्तुतकर्त्ता : श्री ए.जी. पवार और
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अनुमोदनकर्त्ता : श्री ए. रत्नम
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यह संकल्प सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
संकल्प सं. 7 - (1) अनुसूचित जाति संघ की कार्यकारिणी समिति ने इस बैठक
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में योजना आयोग के विरुद्ध अस्पृश्यों की समस्या को हल करने के लिए उपाय एवं साधन खोजने में आयोग की सहायता के लिए संघ से परामर्श न लेने के प्रति रोष प्रकट किया।
(2) इस बैठक में संघ की कार्यकारिणी समिति की राय है कि योजना आयोग के प्रस्तावों में ऐसा कुछ नहीं है जो अस्पृश्नीयता को समाप्त कर सकें या अस्पृश्यनियों की गरीबी को दूर कर सकें।
(3) इस बैठक में संघ की कार्यकारिणी समिति इस बात को पूरी तरह से मानती है कि यह ग्रामीण प्रणाली है जो अस्पृश्नियों एवं हिन्दू जाति के मध्य अनिवार्य सह-अस्तित्व पर आधारित है जो अस्पृश्नीयता एवं अस्पृश्नियों की गरीबी का मूल है।
(4) जब दो पार्टियाँ सह-अस्तित्व का निर्णय लेती है तो यह महत्त्वपूर्ण है कि प्रत्येक को एक दूसरे की मानसिकता एवं मानसिक रवैये को समझना चाहिए। हमें यह ज्ञात होना चाहिए कि वह जो कहते हैं, इसके पीछे वह कैसे और क्या सोचते हैं।
साम्प्रदायिक मानसिकता कैसी होती है ? यह कैसे कार्य एवं प्रतिक्रिया करती है? क्या इसकी कोई मान्य संगठित प्रत्यक्ष अस्तित्व है? यदि हाँ तो क्या इसको समझने की कोई ज्ञेय पद्धति है? और हम इससे क्या सीख सकते हैं ? वस्तुतः हम कहाँ से इसे प्रारम्भ करें?
हिन्दू जाति की प्रतिक्रिया का अध्ययन और उनके वक्तत्यों और प्रचार के असली मंतव्य को समझने की हमारी असफलता हमारी पिछली गलतियों के लिए उत्तरदायी