56. राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने के लिए नहीं होतीं अपितु लोगों को शिक्षित, जागरूक और संगठित करने के लिए होती हैं। - Page 454

437

हैं। हिन्दू जाति की जिस विचारधारा से हमें चिंतित होना चाहिए वह हिन्दू जाति में नहीं पाई जा सकती है। (परन्तु वह विचारधारा रहस्यमयी है)।

(5) कार्यकारिणी की यह पुष्टिकृत राय है कि सह-अस्तित्व की पद्धति को बिल्कुल से समाप्त कर दिया जाना चाहिए।

(6) कार्यकारिणी समिति की राय में अस्पृश्नियों के लिए, जो अब हिन्दू जाति के प्रभुत्व में छोटे-छोटे समूहों में बिखरे हुए हैं, अलग गॉंव स्थापित कर ऐसा किया जा सकता है।

(7) अतः कार्यकारिणी समिति योजना आयोग से अनुरोध करती है कि कृषि योग्य बेकार भूमि का संरक्षण करें, बंजर भूमि को कृषि योग्य बनायें और ऐसी भूमि पर अस्पृश्नियों के लिए कालोनियाँ बनाई जाएँ।

(8) कार्यकारिणी समिति की राय है कि नमक-कर पुनः लगाकर अपेक्षित राजस्व को बढ़ाया जाए।

अध्यक्ष डॉ. बाबा साहब ने स्पष्ट किया कि मैं मानसिक रूप से पूर्णतया विश्वस्त हूँ कि जब तक अनुसूचित जाति हिन्दू जाति के साथ रहेगी तब तक हमारे लोग स्वतन्त्र एवं स्वच्छन्द, हिन्दू जाति के दमन से मुक्त नहीं रहेंगे। मद्रास सरकार अनुसूचित जातियों के लिए नयी कालोनियाँ बसाना चाहती थी परन्तु बाबासाहब इस विचार के कड़े विरोध में थे। वे नहीं चाहते थे कि नई कालोनियाँ निर्मित करके अस्पृश्नीयता के स्थायी बना दिया जाए। वह उन्हें जला कर समाप्त कर देना चाहते थे।

संकल्प को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।

संकल्प सं. 8(1) : संघ की कार्यकारिणी समिति को गोवा सत्याग्रह में हुई मौतों

lad Yi

के लिए खेद था। लेकिन समिति की राय है कि गोवा की स्वतन्त्रता प्राप्त करने का उचित मार्ग सत्याग्रह नहीं है।

(2) समिति द्वारा समझे गये अनुसार सत्याग्रह में सत्य दोनों का साझा आधार है। अंतर केवल आग्रह पर है। ऐसी स्थिति में गाँधीवादी सत्याग्रह संभव है और प्रयोग में लाया जा सकता है। परन्तु जहाँ सत्य पर कोई सहमति नहीं है, वहाँ गाँधीवादी सत्याग्रह निरर्थक है। अतः कार्यकारिणी समिति अनुसूचित जाति को गोवा सत्याग्रह में शामिल होने का परामर्श नहीं देती है।

(3) संघ की कार्यकारिणी समिति की राय है कि गोवा भारत का हिस्सा बन जाए और पुर्तगाली इसे छोड़ दें। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए तीन उपाय हैंः-