परिशिष्ट - I : क्रूर बल अस्पृश्यता को स्थिर नहीं रख पाएगा। - Page 467

450 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

शायद दोष लगाने में कठिनाई होती। इस प्रकार हर प्रकार से दोष ‘‘स्पृश्यों’’ पर है। हिंसक ताकत से अस्पृश्नीयता को कायम नहीं रखा जा सकेगा। यह दलित वर्गों के प्रति सहानुभूति की भावना जागृत करेगी। यह बदलते समय का परिचायक है कि वहाँ पर कम से कम कुछ ‘‘स्पृश्य’’ थे जिन्होंने बेचारे अस्पृश्यों को बचाने का प्रयास किया। काश महाद में ऐसे बहुत से लोग होते। ऐसे अवसरों पर मौन सहानुभूति अधिक उपयोगी नहीं होती है, प्रत्येक हिन्दू जो अस्पृश्यनीयता को हटाने को सर्वोच्च महत्त्व का कार्य मानता है, को ऐसे अवसरों पर दलित वर्गों का सार्वजनिक रूप से बचाव करके और निःसहायों और उत्पीडि़तों के बचाव में हस्तक्षेप करते हुए स्वयं आहत होकर अपनी सहानुभूति सिद्ध करनी चाहिए।

मैं समझता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर बम्बई विधानपरिषद् एवं महाद नगरपालिका के संकल्प की व्यवहार्यता की जाँच करने के लिए तथा कथित अस्पृश्यों को टैंक के पास जाकर अपनी प्यास बुझाने के लिए परामर्श देने में पूर्णतया न्यायसंगत है। इस प्रकार की कोई घटना हिन्दू महासभा जैसी संस्थाओं, जो इस सुधार में रुचि रखते हैं, द्वारा अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। मेरे संवाददाता द्वारा दिये गये वक्तव्य की वे जाँच करें और यदि वे प्रमाणित हो जाए तो उन्हें ‘‘स्पृश्यों’’ के कार्य की निन्दा करनी चाहिए। प्रत्येक बुराई तथा अस्पृश्यता निसंदेह रूप से एक बुराई है, के उन्मूलन के लिए प्रबुद्ध लोकमत में बढ़ोतरी जैसा कुछ भी नहीं है। ख्1,

  1. यंग इंडिया, दिनांक 28 अप्रैल, 1927।

पुनर्मुद्रित : गणवीर, महाद समता सांगर, पृष्ठ 246-248।