30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
को सुनने के पश्चात् और खुले सम्मेलन में उनके द्वारा दिए गए इस आश्वासन पर विचार करते हुए कि सरकार समान अधिकारों के संघर्ष में, दलित वर्गों के लिए हर सहानुभूति रखती है, यह संकल्प किया कि सत्याग्रह को सिविल न्यायालय का निर्णय आने तक स्थगित रखा जाए।’’ ख्1,
‘‘सम्मेलन सहमत हुआ। प्रतिनिधियों ने तत्काल एक जुलूस बनाया और वह रवाना हुआ, स्वयंसेवक नारों, तख्तियों और पट्टियों के साथ धीरे-धीरे चल रहे थे। जुलूस तालाब पर पहुंचा और उसने इसका चक्कर लगाया। सवर्ण हिन्दू क्या कर रहे थे? गलियां सूनी थीं। उन्होंने अपने मकान बंद कर लिए थे और कट्टरपंथी हिन्दू अपने दिलों में तीक्ष्ण द्वेष से छटपटा रहे थे। डेढ घंटे बाद जुलूस दोपहर के आसपास बिना किसी दुर्घटना के पंडाल में वापस आ गया।’’ ख्2,
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डॉ. अम्बेडकर रायगढ़ में
‘‘अछूतों’’ ने गंगा सागर तालाब में स्नान किया
दिनांक 3 जनवरी के ‘‘कोलाबाःसमाचार ऑफ पेन’’ में एक संवाददाता लिखता हैः सत्याग्रह सम्मेलन की समाप्ति के बाद डॉ. अम्बेडकर लगभग एक सौ अछूतों के साथ प्रसिद्ध किले और शिवाजी की राजधानी रायगढ़ के लिए रवाना हुए। उन्होंने रायगढ़ धर्मशाला में अपना डेरा डाला। धर्मशाला समिति द्वारा अनुरक्षित उस स्थान के मराठा जाति के चौकीदार येशु शेडगे ने आगंतुकों की देखभाल की। उसने उनसे गंगासागर तालाब का जल छूने से मना किया। उसने उनसे कहा कि अगर वे स्नान करना चाहते हैं तो वह समीपस्थ, विशेषकर अछूतों के लिए निर्मित दूसरे तालाब में स्नान कर सकते हैं। तथापि, डॉ. अम्बेडकर और अन्य ने ‘‘गंगासागर’’ के जल को ‘‘अपवित्र’ किया।
संवाददाता आगे वर्णन करता है कि इससे रायगढ़ घाटी के मराठों में काफी उत्तेजना उत्पन्न हुई, जिनमें से अधिकांश सेना में सिपाही थे और घाटी उनकी भर्ती के लिए अच्छा क्षेत्र है। ख्3,
1.2.3. द इंडियन नेश्नल हेराल्ड, दिनांक 31 दिसम्बर, 1927।कीर, पृष्ठ 104।द बंबई क्रॉनिकल, दिनांक 12 जनवरी, 1928।