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मेरे जीवन से रोशनी जा चुकी है। वह आज दोपहर 2 बजे गुजर चुकी है। ख्1,
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टिप्पणी करना अनावश्यक है। डाक्टर की अमानवीयता के सम्बंध में कोई क्या कहे जिसने एक शिक्षित व्यक्ति होते हुए भी थर्मामीटर लगाने से मना कर दिया एक और मुसलमान के माध्यम से थर्मामीटर लगवाया और उसे साफ करवाया और जिसमें दो दिनों से बीमार पड़ी महिला का इलाज करने से मना करके उसके साथ कुत्ते या बिल्ली से भी बदतर व्यवहार किया। उस समाज के सम्बंध में क्या कहा जाए जो इस अमानवीयता को सहन करते हैं? कोई भी केवल चिन्तन कर शोक प्रकट कर सकता है।
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- यंग इंडिया, दिनांक 5 मई, 1927।