454 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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परिशिष्ट-3
‘‘अस्पृश्य’’ के साथ कथित नृंशस व्यवहार महार होने का अपराध श्री केशव जी रण छोड़ वाघेला ने अहमदाबाद से डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, अध्यक्ष, बहिष्कृत हितकारिणी सभा को निम्न प्रकार से सूचित कियाः
एक व्यक्ति बापूराव लक्ष्मण और उसके भाई कौराव पिछले छः वर्षों से अहमदाबाद के निवासी हैं। वे मराठा जाति से संबंधित दक्षिण के कुछ लोगों से मिलते-जुलते थे। कौराव के दो बच्चे दामू और लक्ष्मण ने मराठों की भजन मण्डली में हिस्सा लेना प्रारम्भ कर दिया। लेकिन मराठों को हाल ही में ज्ञात हुआ कि दामू और लक्ष्मण जाति से महार हैं और इसे सुनिश्चित करने के लिए सूरत और अहमदाबाद के बीच पार्सल गाड़ी पर कार्यरत दो महारों को दामू और लक्ष्मण की पहचान करने के लिए विशेष रूप से बुलाया गया। यह सुनिश्चित होने के पश्चात् उन्हें इस महीने की 11 तारीख को आधी रात को कालूपुर, भंडेरी पोल पर भजन मण्डली में विशेष रूप से बुलाया गया। उनसे पूछा गया कि वे किस जाति से संबंधित हैं, दामू और लक्ष्मण ने उत्तर दिया कि वे सोमवंशी हैं। इस उत्तर से मराठा क्रुद्ध होकर भड़क उठे और उनसे स्वयं को व उनके स्थानों को दूषित करने के लिए गाली-गलौच करने लगे। महार भाईयों को मराठों द्वारा मारा-पीटा भी गया। इन दोनों भाइयों में से एक ने सोने की अंगूठी पहनी हुई थी। इसे उससे जबर्दस्ती छीन कर 11/- रुपये में बेच दिया गया। इसमें से 6/- रुपये उन महारों को दे दिये गये जिनको सूरत से भाइयों की पहचान करने के लिए बुलाया गया था। दामू और लक्ष्मण मराठों से याचना करते रहे कि उन्हें अपने घरों को वापिस जाने की इजाजत दी जाए परन्तु मराठों ने कहा कि जब तक वे 500/- रुपये के जुर्माने का भुगतान नहीं कर देते तब तक नहीं जा सकते। महार भाइयों द्वारा इतनी बड़ी रकम देने में अपनी असमर्थता व्यक्त करने पर एक मराठा ने सुझाव दिया कि महार भाइयों पर केवल 125/- रुपये का जुर्माना किया जाए। परन्तु तभी एक मराठा ने जुर्माने के प्रस्ताव का विरोध यह कहते हुए किया उन्हें जुर्माने से सन्तुष्ट नहीं होना चाहिए। परन्तु महारों को अपनी जाति छुपाने के अपराध के लिए कड़ा दण्ड देना चाहिए। दण्ड प्रक्रिया निर्धारित करने के पश्चात महार भाइयों को बन्दी बना लिया गया और प्रातः लगभग 9 बजे उनका नृंशस रूप से अपमानित किया गया। उनकी बॉयी ओर की मूंछ एवं दायी ओर की भौंह काट दी गई। उनके शरीर पर तेल एवं गन्दगी मिली कालिख मल दी गई और उनके गलों में पुराने जूतों की मालाएँ पहना दी गईं और