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उनमें से एक को कहा गया कि अपने हाथ में झाडू ले और दूसरे को अपने हाथ में दफ्ती लेने के लिए कहा गया और उस पर यह लिखा था कि यह सजा उन अपराधियों को दी जा रही है जिन्होंने उच्च जाति के लोगों को छूने का साहस किया है। महार भाइयों को लगभग 75 लोगों के जुलूस में ले जाया गया और आगे नगाड़ा बजाया जा रहा था।
उक्त दोनों महार भाइयों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। अभियुक्तों ने अपने बयानों में स्वीकार किया है कि दामू एवं लक्ष्मण के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया है परन्तु यह तर्क दिया गया है कि शिकायतकर्त्ता अपनी इच्छानुसार सजा भुगतने के लिए सहमत हुए थे। जब उन्हें तिरस्कृत, अपमानित एवं कड़ी सजा के लिए धमकाया जा रहा था और वास्तव में तिरस्कृत कर नृशंस व्यवहार किया जा रहा था तब स्पष्ट रूप से दामू और लक्ष्मण असहाय थे। इस मामले ने अस्पृश्य जाति से सम्बंधित लोगों में बहुत बड़ी संवेदना जागृत कर दी है और प्रयास किये जा रहे हैं कि शिकायतकर्त्ताओं को उचित कानूनी सहायता प्रदान की जाए। ख्1,
- द बॉवे क्रॉनिकल्स, दिनांक 25 फरवरी, 1928।