परिशिष्ट - IV : पूना संधि की पूर्वसंध्या पर गांधी-वल्लभ भाई की बैठक। - Page 473

456 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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परिश्ष्टि-
पूना- समझौते की पूर्व-संध्या पर गाँधी- वल्लभ भाई की बैठक

6 सितम्बर, 1932 को यरवदा जेल में निम्नानुसार विचार-विमर्श हुआः

‘‘बल्लभ भाई पटेलः आप क्या सोचते हैं कि ये लोग (ब्रिटिश सरकार) क्या

करेंगे?

गाँधी जीः मुझे अभी भी विश्वास है कि वे मुझे 19 या इससे पूर्व

छोड़ देंगे। यह दृष्टता की चरम-सीमा होगी यदि वे मुझे

अनशन करने देते हैं और किसी को इसकी जानकारी

नहीं देते हैं और तब कहा जाएगा कि मैंने एक कैदी के

रूप वह सब किया है जो नहीं करना चाहिए था और

वे इस सम्बंध में कुछ नहीं कर सके। मैं यह नहीं कह

सकता कि वे इस सीमा तक नहीं जा सकते जब तक

कि वे इसे आवश्यक नहीं समझेंगे और ये निश्चित रूप

से ऐसे लोग नहीं हैं जो आवश्यकता से अधिक आगे

बढं़े।

व. पटेल : तब आप क्या करेंगे?

गाँधी जीः अनशन 20 से प्रारम्भ नहीं हो सकता, हम 20 तारीख

को इसके लिए निर्धारित नहीं कर सकते।

वी पटेलः तब इस का अर्थ यह हुआ कि नया संविधान तैयार

होने तक हमें समय मिल जाएगा? या कि आप जनता

एवं सरकार को इसके लिए अधिक लम्बा समय देंगे?

गाँधी जीः हाँ, परन्तु यह मेरे रिहा होने के पश्चात लोग मुझे कितना,

कार्य करने की सहमति देते हैं। मैं नहीं कह सकता

कि स्थिति क्या होगी। मेरे पास ऐसा कोई विचार नहीं