परिशिष्ट - IV : पूना संधि की पूर्वसंध्या पर गांधी-वल्लभ भाई की बैठक। - Page 474

457

है कि मुझे किस प्रकार का पत्र लिखना चाहिए? परन्तु मुझे प्रत्येक पार्टी, हिन्दू समाज, अन्तयाजस, सरकार, मुस्लिम- के लिए विचार करना होगा। हिन्दुओं के लिए यह आवश्यक होगा कि प्रत्येक स्थान पर अन्तयाजस के साथ बैठकें करें और इस बात का विरोध करें सरकार ने ऐसा इसाई सरकार होने के नाते किया है और मुझे सरकार एवं ईसाइयों दोनों को बताना होगा कि ईसाई होने के नाते आप ऐसा नहीं कर सकते। हमारे स्वराज्य को अस्तित्व में आ जाने दो तब वे अन्तयाजस को जिस प्रकार चाहें उसी प्रकार प्रभावित करें परन्तु वे हमें आज विभाजित नहीं कर सकते है। मैंने ऐसा मुसलमानों को इंग्लैंड में भी कहा है। मैं यही बात यहाँ भी कहता हूँ। मैं हिन्दू समाज को स्पष्ट करता हूँ कि अन्तयाजस के पास मुसलमान या इसाई बन जाने के सिवाय अब कोई विकल्प नहीं है।

महादेव देसाईः आने वाले लोगों में ईसाई मित्र भी होंगे और वे आपको कहेंगे कि सरकार को दोषी ठहराने से पूर्व अपने आपको दोषी मानें। हिन्दू समाज अन्तयाजस को अस्पृष्य क्यों मानता है?

गाँधी जीः इसको मुझे स्पष्ट करना है। यह कठिन बात नहीं है। हम उनको कह सकते हैं, ‘‘हमें हमारी समस्या का समाधान करने दीजिए, आप क्यों हस्तक्षेप करते हैं? जब हम अपने निजी मामलों का प्रबन्धन कर चुकें तो आप जो कुछ करना चाहते हैं, करिए। आप हमें विभाजित क्यों करना चाहते हैं और तब बातों पर तर्क क्यों करते हैं? आज अन्तयाजस को या तो मुसलमान या आपके अनुसार परिवर्तित होना है। महिलाओं का प्रश्न भी अन्तयाजस के समान है। परन्तु महिलाएँ अस्पृश्य नहीं हैं यदि वे अस्पृश्य बनना भी चाहेंगी तो पुरुष उनके बिछौनों पर जाकर बैठ जाएँगे। उन्हें अलग चुनाव-क्षेत्र प्रदान कर दिये जाने के बावजूद भी अलग नहीं किया जा सकता है। आज अन्तयाजस स्थायी रूप से अलग