458 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हो चुके हैं। इसका क्या परिणाम होगा? इससे आन्तरिक
कलह हो सकती है। इसमें जैसे लोग हैं वह समुदाय
के दुष्ट लोगों को इक्ट्ठा कर लेंगे और हिन्दुओं पर
आक्रमण करेंगे, कुंओं में जहर मिलायेंगे और अन्य कार्य
करेंगे। ख्1,
बापू जी ने एच.एस.एल. पोलक को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने अनशन करने की
परिस्थितियों का स्पष्ट उल्लेख किया है जो उन्होंने लिखा वह इस प्रकार हैः
‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि आपने अनशन के अंतर्भूत विचार को नहीं समझा है। आप अल्पसंख्यक समिति में मेरे भाषण का अध्ययन करें। यह तैयार किया हुआ भाषण नहीं था। इसका अन्त अत्यन्त अप्रतिरोध्य ढंग से सामने आया था। अनशन सत्यनिष्ठा पूर्वक की गई घोषणा का अपरिहार्य परिणाम था। में नहीं जानता कि घोषणा को किस प्रकार पूरा किया जाएगा। मैं कहता हूँ कि घोषणा ईश्वरीय थी तथा इस प्रकार यह संपन्न भी हुआ। यदि यह ईश्वरीय था तो तर्क व्यर्थ है। यदि यह भ्रम था, और मेरे जो दोस्त ऐसा मानते हैं तो वे मुझे प्यार व सतत आग्रह से वास्तविक सच्चाई से अवगत कराएँ।
‘‘अब तक जो कुछ हुआ है उससे मेरे मत को बल मिला है कि अनशन ईश्वरीय विश्वास पर आधारित था। प्रधान मन्त्री के माध्यम से नहीं अपितु सर सैम्यूल होरे के माध्यम से अनशन का सन्देश जाना अपेक्षित था। किन्तु यदि आपने मेरे द्वारा दिये गये सभी वक्तव्यों तथा प्रधान मन्त्री को लिखे सभी पत्रों को समझा हो तो आपने पाया होगा कि अनशन उन लाखों लोगों को समर्पित है जिनको मुझ पर विश्वास है और जब कभी मैं उनके मध्य जाता हूँ तो वे अपने शाश्वत प्यार से मुझे घेरे रहते हैं। वे बिना किसी तर्क के अनशन को उसके आशयों सहित समझते हैं। उनके लिए इसका राजनीतिक हिस्सा महत्वपूर्ण नहीं बल्कि आन्तरिक सुधार ही प्रमुख ध्येय था।’’
‘‘आपने पूछा कि यह दस वर्ष पूर्व क्यों नहीं किया गया था इसका उत्तर यह है कि ईश्वर ने तब इसके लिए मेरा आह्वान नहीं किया था। उसने आकर मुझे तब चेतन्य किया जबकि मुझे इसकी बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। उसके तरीके हमारे
- भारत सरकार, द कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, नई दिल्ली
खण्ड 11, पृष्ठ 457-458।