परिशिष्ट - IV : पूना संधि की पूर्वसंध्या पर गांधी-वल्लभ भाई की बैठक। - Page 476

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तरीकों से बहुत भिन्न हैं। निस्संदेह आप मुझ पर विश्वास करेंगे कि मुझमें समर्पण की तब भी वही क्षमता होती जो अब दिखाई देती है।’’ ख्1,

  1. तत्रैव, खण्ड LI, पृष्ठ 252-252।

उपर्युक्त सभी पुनर्मुद्रित, डॉ. बुसी : पृष्ठ 88-190।