परिशिष्ट - V : गोल मेज सम्मेलन और पूना संधि पर टिप्पणी। - Page 477

460 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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परिशिष्ट-5
गोल मेज सम्मेलन एवं पूना समझौते पर टिप्पणियाँ
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संसद की संयुक्त चयन समिति

‘‘जातीय निर्णय एवं पूना समझौता’’

समिति का स्पष्ट मत है कि वर्तमान समय में जातीय प्रतिनिधित्व अपरिहार्य है। जातीय निर्णय में उल्लिखित प्रान्तीय विधानसभाओं के गठन की व्यवस्था को वह पूर्व सुनियोजित एवं संतुलित मानती है।

पूना समझौते के सम्बंध में, समिति ने विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि उनकी राय में महामहिम सरकार का मूल प्रस्ताव सामान्य साम्प्रदायिक प्रश्नों का अधिक उपयुक्त हल होगा और दलित वर्गों के लिए उनके उत्थान के वर्तमान स्तर हेतु लाभदायक भी होगा। परन्तु यदि समझौते को निर्णय के अधिकृत संशोधन के रूप में स्वीकार कर लिया जाता है तो समिति के समक्ष यह स्पष्ट हो चुका है कि अब यह रदद नहीं हो सकता है। लेकिन उनकी मनोवृत्ति यह हो कि क्या सहमति द्वारा बंगाल में दलित वर्गों के लिए आरक्षित सीटों में करने कमी और संभवतः अन्य प्रान्तों में उनकी सीटों की संख्या में अनुपूरक वृद्धि हो जाने से बंगाल के नये संविधान की कार्यशीलता बेहतर हो जाएगी। (भारतीय सह्मविधान सुधार, पृष्ठ 4, दिनांक 22 नवम्बर, 1934 पर श्वेत पत्र में दिये गये प्रस्तावों पर संसद की संयुक्त चयन समिति की रिपोर्ट का संक्षिप्त विवरण) ख्1,

  1. पुनर्मुद्रित, खैरमोरे, खण्ड 5, पृष्ठ 65-66।