466 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
तीसरी बात जो सिद्ध हुई वह यह थी कि जब भी महात्मा गाँधी को राजनी तिज्ञ पर हावी होने की छूट मिली गाँधी तो उन्होंने साधारण चीज़ को जटिल एवं उलझावपूर्ण बनाने का करिश्मा कर दिखाया। गोल मेज़ सम्मेलन में महात्मा गाँधी राजनीतिज्ञ गांधी पर हावी रहे जिसके फलस्वरूप महात्मा ने दुनिया को हिला दिया पर राजनीतिज्ञ गांधी असफल रहे यरवदा में राजतिज्ञ गांधी सफल रहे परंतु राजनी तिज्ञ गांधी हार गए। गाँधी की विजय इतनी प्रभावी एवं जबरदस्त थी कि उन्होंने डॉ. अम्बेडकर को उनके सभी जीवन रक्षक हथियारों से वंचित कर दिया तथा उन्हें शक्तिहीन बना दिया जैसे इन्द्र ने कर्ण के मामले में किया था। डॉ. अम्बेडकर अपने कथन में सही थे कि गाँधी ने गोलमेज़ सम्मेलन में दलित वर्गों की समस्याओं के मामले में पर्याप्त लचीलापन दिखाया होता तो महात्मा को कठिन परीक्षा से गुजरने की आवश्यकता नहीं होती।
गाँधी की कठिन परीक्षा स्वयं उनके द्वारा निर्मित थी। पूना समझौता एक ऐतिहासिक घटना का समापन था। परन्तु क्या 14 अगस्त, 1931 * को मनीभुवन में घोषित युद्ध का अन्त हुआ? या क्या यह दूसरी लड़ाई थी और युद्ध विराम के बाद भी जारी रहना था?’’ ख्1,
* इस भाग का पृष्ठ 51-56 देखें - संपादक
1 कीर, पृष्ठ 215-16।