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डॉ. अम्बेडकर ने श्री गाँधी को अब कठिन परीक्षा में डाल दिया है।
यह पत्र दी टाइम्स ऑफ इण्डिया’, के एक पाठक का है जो मन्दिर में प्रवेश अभियान के संबंध में टाइम्स ऑफ इण्डिया में प्रकाशित हुआ था। ‘‘डॉ. अम्बेडकर का बम
श्री गाँधी के लिए परीक्षा
‘‘दी टाइम्स ऑफ इण्डिया’’ के सम्पादक के नाम
महोदय,
आपका पूना का संवाददाता बिल्कुल सही है। डॉ. अम्बेडकर ने ‘‘मन्दिर प्रवेश अभियान-तंत्र के केन्द्र में जीवित बम’’ फेंका है। यह इससे भी बहुत बड़ा है, अस्त्र यह एक बम (देश में ही निर्मित) है जिसे कांग्रेस कैम्प पर फेंका गया है। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस लगभग खत्म हो चुकी है और यह मन्दिर प्रवेश अभियान एक मृत शरीर में जान फूंकने का एक रोचक प्रयास मात्र है। प्रारम्भ से ही डॉ. अम्बेडकर ने हमें चेतावनी दी थी कि श्री गांधी एवं उसकी कांग्रेस द्वारा वेग पूर्ण प्रचार वास्तव में केवल एक ‘‘राजनीतिक प्रदर्शन’’ है अब वह श्री गांधी को एक कठिन परीक्षा में डाल रहे हैं। हमारे समक्ष दो प्रश्न हैं : (1) क्या महात्मा इस मन्दिर प्रवेश के प्रश्न के संबंध में गंभीर हैं या क्या यह एक चेष्टा मात्र है। (2) क्या केवल मन्दिर में प्रवेश देने से ही दलित वर्गों की सामाजिक स्थिति में सुधार हो जायेगा। श्री गांधी मन्दिर प्रवेश के प्रश्न पर वास्तव में गंभीर नहीं हैं, इस बात की पुष्टि उनकी अपनी स्वीकारोक्ति से होती है कि ‘‘उन्होंने स्वयं कभी इन मन्दिरों में प्रवेश नहीं किया।’’ वस्तुतः श्री एम.के. आचार्य, महान् रूढि़वादी हिन्दू नेता ने पिछले सप्ताह सूरत में अपने भाषण में हमें स्मरण कराया किः श्री गाँधी ने स्वयं कभी किसी मन्दिर में पूजा नहीं की और उन्हें मन्दिर में पूजा के नियमों एवं विनियमों की बहुत कम जानकारी है। श्री आचार्य जैसे सभी रूढि़वादी हिंदुओं जिन्होंने 20 वर्षों से श्री गांधी का निष्ठापूर्वक समर्थन किया है, ने अब उन्हें तथा कांग्रेस को छोड़ दिया है।