32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और इसीलिए इसकी अवज्ञा करने का कोई प्रश्न कभी भी उत्पन्न नहीं हुआ। उन्होंने जो कुछ किया, वह यह था कि उनसे कोलाबा के जिलाधीश द्वारा ‘‘सत्याग्रह’’ बाद की तारीख तक स्थगित करने के लिए कहा गया था और उन्होंने ऐसा संपूर्ण रूप से सत्याग्रहियों और अछूतों के हित में किया। वे अपने आलोचकों को अपने विरुद्ध इस स्पष्ट आधार पर कुछ भी कहने की पूर्ण स्वतंत्रता देते हैं।’’ ख्1,
‘‘चौदार तालाब के स्वामित्व से संबंधित हिन्दू बनाम अछूतों का मुकदमा द्वितीय वर्ग के उप-न्यायाधीश; महाद के न्यायालय में दिनांक 12 जनवरी, 1928 को सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया था। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने मुकदमे की पैरवी के लिए तैयारी प्रारंभ कर दी। उन्होंने दिनांक 24 जनवरी, 1928 को कतिपय दस्तावेज प्राप्त करने और न्यायालय में उपस्थित होने के लिए अधिवक्ता मार्कण्ड दत्तात्रेय वैद्य को पत्र लिखा। उन्होंने श्री वैद्य से विशेष तौर पर दिनांक 30 जनवरी, 1928 को धर्मग्रंथों से विभिन्न उद्धरणों का वर्णन करते हुए डॉ. बी.आर. अम्बेडकर और अन्य लोगों के पक्ष में श्री पांडुरंग भास्कर शास्त्री पलाये नामक एक ब्राह्मण पुजारी द्वारा दाखिल किए गए शपथपत्र की एक प्रति प्राप्त करने का अनुरोध किया। यह पत्र निम्नानुसार है :
भीमराव आर. अम्बेडकर दामोदर हॉल, परेल एम.ए., पीएचडी, डीएससी बंबई, 12 बार एट लॉ, 24.1.1928 सदस्य, विधान परिषद
बंबई।
प्रिय वैद्य,
मुझे आपका 12 तारीख का पत्र मिला। मुझे लगता है कि न्यायालय पहले अर्थात् 5 फरवरी के पूर्व की गई बहस पर निषेधाज्ञा जारी करने के लिए उत्सुक है। ठीक है, मैं मामले में बहस करने के लिए वृहस्पतिवार, 2 फरवरी को आने की सोच रहा हूं।
मैं इसके साथ शपथपत्र के प्रपत्र भेज रहा हूं, जिसे आप कृपया विधिवत तैयार कर लें और समय से उनकी घोषणा कर दें। आपको शपथपत्र दाखिल करने के लिए किसी मुसलमान कसाई (मेरे पास एक कसाई अवश्य होना चाहिए) की तलाश
- द बंबई क्रांमिकल, दिनांक 27 फरवरी, 1928।