खण्ड - I महाड सत्याग्रह पानी के लिए नहीं, बलिकु मानवाधिकारों की स्थापना के लिए - Page 50

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करने में कुछ कठिनाई हो सकती है। परंतु आप अगर महाद के पुलिस सब-इंस्पेक्टर से मिलेंगे तो मुझे विश्वास है, वह आपको हमारा समर्थन करते हुए ब्राह्मण पुजारी द्वारा दाखिल शपथपत्र, जिसे यहां घोषित किया जाएगा, की प्रति देकर अनुगृहित करेंगे।

कृपया तारीख के समय प्रतिवादियों को पर्याप्त नोटिस दे दें तथा शपथपत्रों की प्रतियां भी दे दें ताकि उनके पास शिकायत का कोई कारण न रहे। कृपया सूर्बा को मेरा सादर नमस्कार कहें। मुझे आपका उत्तर अधिक से अधिक 30 जनवरी सोमवार तक अवश्य मिल जाए जिसमें यह सूचित किया जाए कि क्या 2 फरवरी के लिए हर चीज तैयार है।

अत्यंत आदर सहित,

आपका

ह./-

बी.आर. अम्बेडकर‘‘ ख्1,

महाद सत्याग्रह के बारे में पी. आर. लेले का लेख निम्नलिखित है :

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डॉ. बी. आर. अम्बेडकर और अन्य को उस तालाब से पानी लेने से रोकने के लिए हुए महाड के प्रसिद्ध चौदार तालाब के अछूतों का सत्याग्रह को महाड के उप-न्यायाधीश द्वारा मंजूर की गई अस्थायी निषेधाज्ञा के दृष्टिगत रोकना पड़ा था। उस समय अर्थात पिछले दिसम्बर में उन्हें एक सम्मेलन आयोजित करके एवं हिंदू जाति की निरंकुशता एवं अत्याचार के विरुद्ध अपना रोष कई प्रकार से सुस्पष्टतः व्यक्त करके संतुष्ट होना पड़ा था।

उस सम्मेलन के प्रतिनिधियों और आगंतुकों ने एक विशाल जुलूस आयोजित किया और अत्याचारियों को अपनी विशाल संख्या का बोध कराया। इसके बाद डॉ. अम्बेडकर ने चुने हुए दल के साथ महाद तालुका और यहां तक कि रायगढ़ किले का चक्कर लगाया। मैं ऐसा कुछ भी कहने से बचना चाहता हूँ जिसकी डॉ. अम्बेडकर उन कतिपय समाचारपत्रों, जिन्होंने कथित रूप से भ्रामक रिपोर्टें दी हैं, के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही करने की सोच हैं अथवा संभवतरु आरंभ कर दी है।

  1. खैरमोरे, खंड 3, पृष्ठ 239, 244, 245।