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III
राजा का प्रत्युत्तर
श्री सी. राजगोपालाचारी द्वारा राय बहादुर राजा को लिखे पत्र में कहा है :
‘‘मेरे पास आपकी टिप्पणी एवं अनुलग्नक हैं। मैंने पढ़ा है। उस सारे मामले को शैतानी प्रस्ताव कहना गलत होगा। मैं खुश हूँ आपने महात्माजी को पत्र भेजा था। मैं खुश हूँ आपने ऐसा प्रत्युत्तर दिया है और सरसरी तौर पर इस विचार को अस्वीकार कर दिया।’’ ख्1,
IV
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पूना समझौते के अंतर्गत मिलने वाले लाभ हिंदुवाद से मांगने वाले लोगों को नहीं मिलेंगे।
श्री पी.एन. राजभोग, हरिजन नेता एवं सचिव अखिल भारतीय दलित वर्ग लीग ने डॉ. मुज्जे की योजना पर अपने बयान में कहा, पूना समझौते के लाभ हिन्दूवाद से भागने वाले जाना नहीं। पूना समझौते में हिन्दूवाद से धर्मान्तरण करने वाले लोगों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है और यदि हरिजन सम्प्रदाय का कोई व्यक्ति सिख या अन्य धर्म को अंगीकार करता है तो पूना समझौते के हस्ताक्षरकर्त्ताओं को ऐसा कोई अधिकार प्राप्त नहीं है कि समझौते के अन्तर्गत मिलने वाले लाभ उस व्यक्ति को प्रदान कर सकें। श्री राजभोग ने इसके साथ ही कहा कि पूना समझौते का विशेष अभिप्राय दलित वर्गों के सदस्यों को अधिकतम रियायत देना है ताकि वे हिन्दू संघ के अभिन्न अंग बने रहें। यह रियायत उन पर लागू नहीं होगी जिन्होंने हिन्दू संघ को छोड़ दिया है या छोड़ रहे थे।
डॉ. अम्बेडकर ने समझौते के समय कभी धर्मान्तरण का प्रश्न नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि उनके विचार से अधिक रियायतें प्राप्त करने के लिए अब आवाज उठाई जा रही है।
- द बाँबे क्रॉनिकल्स : दिनांक 8 अगस्त, 1936।