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महात्मा गाँधी के विचार
महात्मा गांधी का श्री राजा को दिनांक 26 जुलाई, 1936 को लिखा गया पत्र ः
‘‘मुझे आपके डॉ. मुज्जे को लिखे गए पत्र पर सामान्य समर्थन देने में कोई कि ठनाई नहीं है। मैं डॉ. मुज्जे या डॉ. अम्बेडकर की स्थिति को बिल्कुल नहीं जानता। मेरे अनुसार अस्पृश्नीयता को समाप्त करने का प्रश्न अपनी एक विशेष दशा पर टिका हुआ है। मेरे लिए यह एक गंभीर धार्मिक प्रश्न है। हमारे धर्म का अस्तित्व पश्चाताप की भावना में सवर्ण हिन्दूओं द्वारा उसको स्वैच्छिक रूप से समाप्त करने पर निर्भर करता है। मेरे लिए यह कभी भी आदान-प्रदान का मामला नहीं हो सकता है। और मैं खुश हूँ कि आप लगभग बात पर अडिग है जिस पर मैं हूँ (वार्षिक रजिस्टर
खण्ड- II, जुलाई-दिसम्बर, 1936 पृष्ठ, 276-279)’’ ख्1,
VI
पंडित मदनमोहन मालवीय द्वारा दिनांक 30 जुलाई, 1936 को राय बहादुर एम.सी. राजा को भेजा गया तार :- आपके डा. मुज्जे को लिखे पत्र की प्रतिलिपि के लिए धन्यवाद। मैं आपसे सहमत हूँ-ए.पी. ख्2,
खैरमोरे, खण्ड 6, पृष्ठ 191-193 ।
दिनांक 8 अगस्त, 1936, द बॉबे क्रॉनिकल।