34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस दल के भ्रमण ने महाद तालुका में एक सनसनी पैदा कर दी, जिसकी प्रतिक्रिया स्वरूप समीपस्थ कुछ गांवों के मुसलमानों ने भी कुछ समाचारपत्रों में कथित रूप से भ्रामक रिपोर्टें दीं।
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अंतरिम निषेधाज्ञा रद्द
अब महाद के उप-न्यायाधीश ने अंतरिम निषेधाज्ञा रद्द कर दी है। मुझे वादकालीन नोटिस पर निर्णय की प्रति प्राप्त नहीं हुई है परंतु मुझे निश्चित सूचना मिली है कि यह एक सुविचारित और बहुत लंबा है।
न्यायाधीश ने संकेत दिया है कि उन्होंने जब अंतरिम निषेधाज्ञा मंजू की थी तब उन्हें भ्रमित किया गया था और उन्होंने वस्तुतः अपमान और दुख की निरंतरता में सहायक बने रहने के लिए दुख प्रकट किया है। इस चरण पर इससे अधिक नहीं कहा जाना चाहिए क्योंकि मुख्य मुकदमा अभी भी न्यायाधीन है। तथापि, इस समय यह एक सही उद्देश्य की स्पष्ट जीत है। तथाकथित अछूतों द्वारा नागरिक अधिकारों का एक ओर न्यायपालिका तथा दूसरी ओर कट्टरपंथ के बीच फंसे रहने की जोखिम को शामिल किए बिना, प्राख्यान किया जा सकता है।
महान ‘गुरू का बाग संघर्ष’ में सिख सत्याग्रहियों के प्रति लोगों की कम से कम हार्दिक और सर्वसम्मत सहानुभूति थी। महाद की घटना में ऐसा नहीं था। पुरातन पंथी हिन्दुओं के नेताओं ने पूना के प्रमुखों यहां तक कि हिन्दू सभा वालों की सलाह को भी सुनने से मना कर दिया था। जब अधिकारों के वास्तविक दावे की बात सामने आती है तो वही नेतागण यद्यपि नकारे जाने और असफल होने पर, महाद सत्याग्रिहयों के पक्ष में सुदृढ़ प्रवृत्ति नहीं अपनाएंगे जिसे स्थगित किया जाना था, फिर भी उसे अब पुनः प्रारंभ किया जा सकता है।
अगला अभियान
इस बार बहुत कम जोखिम और सफलता की अत्यधिक संभावनाओं के साथ यह अब पुनः प्रारंभ किया जाने वाला है। डॉ. अम्बेडकर, की जो मुकदमे के लिए महाद गए थे, अपनी बहुश्रुत बजट आलोचना देने के बाद, वापसी पर इस मास की 26 तारीख रविवार को दामोदर ठाकरसे हॉल, परेल में सार्वजनिक सभा आयोजित की गई थी।
डॉ. अम्बेडकर ने एक विद्वत्तापूर्ण भाषण में उस दिन मौजूद स्थिति का वर्णन किया और अपने अनुयायियों से उस शीघ्रतम तारीख पर जिस दिन पुनः अभियान प्रारंभ किया जा सकता है, विचार करने के लिए कहा। इस बैठक में दलित और