खण्ड - I महाड सत्याग्रह पानी के लिए नहीं, बलिकु मानवाधिकारों की स्थापना के लिए - Page 54

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प्रकृति सार्वभौमिक है। यह तालाब के मात्र सार्वजनिक उपयोग के लिए खोलने के लिए नहीं था अपितु अपने को बहुआयामी कार्यकलापों के साथ इस किस्म का आंदोलन प्रत्यक्षतः नागरिकता के उनके साधारण विशेषाधिकारों का प्राख्यान करने के लिए एक राष्ट्रीय आंदेलन के विकास का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। हाल ही की बात है कि डॉ. अम्बेडकर ने अछूतों के लिए खादी केंद्र खोलने के अपने आशय की और इस प्रकार सभी बुराइयों के विरुद्ध मन में सत्याग्रह और शरीर पर खादी सहित, महात्माजी के आर्शीवाद से, महान रचनात्मक कार्यक्रम की सहायता करने की घोषणा की, यह आंदोलन अवश्य सफल होगा।

अपने मित्रों से एक शब्द। चूंकि प्रत्येक अच्छे आंदोलन को बाधाओं के कई चरणों से गुजरना होता है और इसे मित्रवत् दुश्मनों तथा साथ ही सचमुच के दुश्मनों का सामना करना होगा, जिनमें से पूर्ववर्ती अधिक खतरनाक हैं - इसलिए भी इस सत्याग्रह के मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं का सामना करना होगा और अंत में विजयी होना होगा। मैं अपने मित्रों से केवल यही अपील करता हूं कि मित्रों अथवा दुश्मनों से इन कठिनाइयों का सामना करते समय उन्हें किसी भी परिस्थिति में अपना साहस, धैर्य और दृढ़ता नहीं खोनी चाहिए अपितु शांतिपूर्ण तथा अहिंसक साधनों द्वारा नम्रतापूर्वक सफल अंत तक संघर्ष जारी रखना चाहिए।

ईश्वर मेरे पीडि़त बंधुओं को शक्ति और सवर्ण हिंदूओं को बुद्धि दे। ख्1,

उप-न्यायाधीश, महाद ने महाड निषेधाज्ञा रद्द कर दी -

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चौदार तालाब - कोई निजी संपत्ति नहीं

‘‘मैं इस आदेश को मेरे द्वारा मंजूर की गई निषेधाज्ञा द्वारा तथा अत्यधिक क्रूर और अन्यायपूर्ण सामाजिक बुराइयों के अधीन पिस रहे समुदाय पर एक और गलती का बोझ लादने में सहायक होने पर यद्यपि वह अस्थायी थी, प्रतिवादियों को हुई असुविधा और कठिनाई पर खेद व्यक्त किए बिना पूरा नहीं कर सकता। मैं अपने द्वारा जारी निषेधाज्ञा को रद्द करता हूं।’’ डॉ. अम्बेडकर और अन्य के विरुद्ध निषेधाज्ञा रद्द करते हुए उप-न्यायाधीश ने ऐसा कहा।

  1. बंबई क्रॉनिकल, दिनांक 2 मार्च, 1928।