38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
स्मरण रहे कि डॉ. अम्बेडकर और अन्य, को जो प्रसिद्ध चौदार तालाब से पानी लेने के मामले में महाद में सत्याग्रह करने के लिए गए थे जैसा श्री पांडुरंग रघुनाथ धरप और अन्य, जिन्होंने दावा किया कि संबंधित तालाब उनकी निजी संपत्ति है, द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार श्री जी.वी. वैद्य, उप-न्यायाधीश, महाद द्वारा दी गई निषेधाज्ञा से ऐसा करने से रोका गया था। समझा जाता है कि डॉ. अम्बेडकर और अन्य तथा हिन्दू कुछ लोगों ने पुनः सत्याग्रह करने का निर्णय लिया है। संभवतः वे हिन्दू नव वर्ष के प्रथम दिन अर्थात् लगभग तीन सप्ताह बाद अभियान प्रारंभ कर सकते हैं क्योंकि उनके विरुद्ध निषेधाज्ञा अब इस आधार पर रद्द कर दी गई है कि उक्त तालाब ‘‘सरकारी नगरपालिका की संपत्ति’’ है।
| fu’ | ksèkk |
|---|
| D | ;k |
|---|
दिनांक 23 फरवरी का निर्णय देते समय उप-न्यायाधीश ने मत व्यक्त किया था कि ‘‘निषेधाज्ञा इस उपधारणा पर दी गई थी कि मुकदमे में चौदार तालाब निजी संपत्ति की प्रकृति का है। मुझे अब यह देखना है कि क्या प्रतिवादियों की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर उपधारणा है अथवा नहीं। मेरी राय में मेरे समक्ष प्रतिवादियों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य द्वारा उपधारणा दृढ़तापूर्वक खंडन किया गया है।
साक्ष्य का विवेचन करते हुए, उप-न्यायाधीश राजस्व संबंधी रिकार्ड के अंशों की प्रतियों और तालाब के पानी के विशेष प्रयोग के लिए नगरपालिका को दिए गए अनेक लोगों के आवेदनों जैसे कतिपय अन्य दस्तावेजों का अवलम्ब लेते हैं और निश्चित रूप से विचार व्यक्त करते हैं।’’ ये सभी कागजात दृढ़तापूर्वक सिद्ध करते हैं कि मुकदमे में वर्णित चौदार तालाब नगरपालिका में विहित सरकारी संपत्ति है, न कि किसी विशेष व्यक्ति की निजी संपत्ति जैसा कि वादियों द्वारा कहा गया है।’’
| Col1 | Col2 | Col3 | Col4 |
|---|---|---|---|
| lk | {; |
|---|
न्यायाधीश आगे कहते हैं : ‘‘यह उपधारणा कि मुकदमे में वर्णित तालाब नगरपालिका की संपत्ति है, इस तथ्य द्वारा और सुदृढ़ की गयी है कि तालाब के पुश्तों पर दो स्थानों में अभिलेख खुदे पत्थर के टुकड़े हैं। प्रतिवादियों के वकील के आवेदन पर स्थान का भ्रमण करने और इन शिलालेखों की प्रतिकृति बनाने के लिए न्यायालय तथा दोनों पक्षों के वकीलों की उपस्थिति में एक आयुक्त नियुक्त किया गया था। यह न्यायालय तथा वादियों की ओर से मैसर्स जोशी एंड साटे तथा प्रतिवादियों की ओर से श्री वैद्य की उपस्थिति में किया गया था। क्रम संख्या