खण्ड - I महाड सत्याग्रह पानी के लिए नहीं, बलिकु मानवाधिकारों की स्थापना के लिए - Page 56

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2 पर अंकित पत्थर के टुकड़े पर मराठी में खुदा नगरपालिका महाद 1899 शब्दों का स्पष्ट शिलालेख है। पत्थर के टुकड़े संख्या 1 पर कुछ शब्द स्पष्टतया दृश्य हैं जबकि अन्य को किसी के द्वारा मिटाया गया प्रतीत होता है और यह भी हाल का प्रतीत होता है।

वादी का हल्का और अपर्याप्त पक्षकथन

इन सभी साक्ष्यों की तुलना में, वादी धरप परिवार के बंटवारा विलेख (प्रदर्श संख्या 45) पर निर्भर करते हैं। ऊपरोक्त सभी साक्ष्य को देखते हुए मात्र इस तथ्य का उल्लेख कि वर्षों पूर्व धरप परिवार के कुछ सदस्यों ने अपने बीच अपने घर के सामने पुश्ते का बंटवारा किया था, बहुत कुछ संकेत नहीं देता और न ही नगरपालिका द्वारा किसी दिवाकर जोशी को दी गई उसके घर के सामने निर्मित पुश्ते की मरम्मत करने की नोटिस, प्रदर्श संख्या 44 ही, अधिक अर्थ देखती है, क्योंकि वह टूटी-फूटी दशा में है और वह तालाब के पानी को दूषित बना रहा है, इससे यह किसी भी प्रकार से तालाब पर वादियों का अधिकार नहीं माना जा सकता।

‘‘कोई विशेष परिरक्षण नहीं’’

अपने गुणागुण पर मुकदमे का चाहे कुछ भी अंतिम निर्णय हो, मैं इस समय पूर्णतः संतुष्ट हूं कि मुकदमे में वर्णित ‘‘चौदार’’ तालाब सरकारी नगरपालिका संपत्ति है, न कि वादियों द्वारा तथाकथित किसी विशेष व्यक्ति की निजी संपत्ति। तब प्रश्न यह उठता है कि क्या वादियों को उसका लाभ लेने से प्रतिवादियों को अपवर्जित करने का अधिकार है या नहीं। इसका उत्तर निस्संदेह ‘‘नहीं’’ है। ऐसी संपत्ति के मामले में, समुदाय के किसी वर्ग विशेष के पक्ष में कोई आरक्षण नहीं हो सकता और प्रतिवादियों को इसका लाभ लेने का उतना ही अधिकार है जितना वादियों का है। इसलिए अपूरणीय क्षति का कोई प्रश्न नहीं उठता। इस मामले में नगरपालिका की संपत्ति होने और प्रतिवादियों का प्रयोग करने का वादियों के समान ही अधिकार होने के कारण यह नहीं कहा जा सकता कि उस अधिकार के उनके प्रयोग से वादियों को कोई क्षति पहुँचती है।

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वादियों के अधिवक्ता की असंतोषजनक बहस

वादियों की ओर से उनके विद्वान अधिवक्ता श्री वीरकर द्वारा तर्क दिया गया कि स्वयं उनकी स्वीकृति पर, प्रतिवादियों ने अभी तक मुकदमे में वर्णित तालाब के प्रयोग का लाभ नहीं उठाया है। परंतु, जब एक बार यह दर्शाया जाता है कि संपत्ति निजी नहीं है अपितु सार्वजनिक है और जनता के लिए खुली है तब कितनी भी लम्बी अवधि