खण्ड - I महाड सत्याग्रह पानी के लिए नहीं, बलिकु मानवाधिकारों की स्थापना के लिए - Page 57

40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के दौरान प्रतिवादियों द्वारा तालाब का प्रयोग नहीं किया जाना उनके हक को किसी भी प्रकार कम नहीं कर सकता। मैं अपने समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य से संतुष्ट हूं कि मुकदमे में वर्णित तालाब वादियों की निजी संपत्ति नहीं है अपितु यह सरकारी नगरपालिका की संपत्ति है और प्रतिवादियों को उसके उपयोग का उतना ही अधिकार है जितना वादियों को है तथा ऐसे अधिकार के प्रयोग में कोई भी हस्तक्षेप पूर्णतः गैर-कानूनी होगा।

मैं इस आदेश को अपने द्वारा दी गई निषेधाज्ञा, यद्यपि वह अस्थायी थी, और अत्यधिक क्रूर और अन्यायपूर्ण सामाजिक बुराइयों के अधीन एक समुदाय पर एक और गलती का बोझ लादने में सहायक थी, द्वारा प्रतिवादियों को हुई असुविधा और कठिनाई पर खेद व्यक्त किए बिना पूरा नहीं कर सकता। मैं अपने द्वारा जारी निषेधाज्ञा रद्द करता हूं।’’ ख्1,

निषेधाज्ञा रद्द करने के बाद बंबई में आयोजित बैठक की पुलिस रिपोर्ट निम्नलिखित है -

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अछूत एवं महाद में सत्याग्रह

दलित और वंचित वर्गों की एक सार्वजनिक बैठक 26 फरवरी को दामोदर ठाकरसे हॉल में आयोजित हुई थी जब जी.एन. सहस्रबुधे ने लगभग 500 लोगों की सभा की अध्यक्षता की।

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, जो प्रमुख वक्ता थे, ने कहा कि चूंकि महाद न्यायालय के उप-न्यायाधीश ने उनके और सत्याग्रही पार्टी के विरूद्ध अंतरिम निषेधाज्ञा रद्द कर दी थी इसलिए वे पुनः सत्याग्रह करने का प्रश्न बंबई की सत्याग्रह समिति के विवेक पर छोड़ देंगे।

निषेधाज्ञा रद्द किए जाने के बाद ‘‘इंडियन नेशनल हेराल्ड’’ द्वारा व्यक्त विचार-

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महाद के उप-न्यायाधीश के अपने द्वारा डॉ. अम्बेडकर और दलित वर्ग के अन्य नेताओं के विरुद्ध जारी अस्थायी निषेधाज्ञा रद्द करने के बाद, समझा जाता है दलितवर्ग महाद में सार्वजनिक तालाब से पानी लेने के अपने नागरिक अधिकार का प्राख्यान करना चाहते हैं। जब पिछली मार्च में दलित वर्ग के सदस्यों ने जो उसी स्थान में

  1. द बंबई क्रॉनिकल, दिनांक 3 मार्च, 1928।