खण्ड - I महाड सत्याग्रह पानी के लिए नहीं, बलिकु मानवाधिकारों की स्थापना के लिए - Page 59

42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के लिए प्रस्थान करेंगे तब कोई विरोध ही नहीं होगा बल्कि सवर्ण हिन्दू ‘‘जाति’’ के लोगों की ओर से उनका हार्दिक और सौहार्दपूर्ण स्वागत होगा। ऐसी कारवाई उनके साथियों को क्रूरतापूर्वक दिए गए घावों को भरने में बहुत सहायक होगी।’’ ख्1,

महाद सत्याग्रह ने कुछ हिन्दूओं की सामाजिक प्रवृत्तियों को परिवर्तित कर दिया। इसका एक उदाहरण निम्नलिखित है -

‘‘जातियों को दूर करना

बंबई में सर्वजाति रात्रि भोज

दामोदर ठाकरसे हॉल, परेल में 5 तारीख को समाज-समता संघ (सामाजिक समानता लीग) के तत्वावधान में सर्वजाति रात्रि भोज आयोजित किया गया।

इस रात्रि भोज में तथाकथित 50 अछूतों सहित विभिन्न जातियों के लगभग 1500 व्यक्तियों ने भाग लिया। श्री डी. वी. नायक, ब्राह्मण-ब्राह्मणेत्तर के संपादक और लीग के उपाध्यक्ष ने अतिथियों का यह कहते हुए स्वागत किया कि लीग द्वारा ऐसे रात्रि भोजों का आयोजन जाति के बंधनों को जिसने सामान्यतया भारतीय राष्ट्र और विषेषतया हिन्दू समाज को विभाजित और विघटित किया है, दूर करने के लिए किया गया था। उन्होंने आगे कहा कि परस्पर मेलजोल और परस्पर भोजन के माध्यम से ही जाति प्रथा की बुराई नष्ट की जा सकती है और समान स्तर पर आधारित एक नया समाज विकसित किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि वे सभी न केवल अपरिहार्य आवश्यकता (आपद-धर्म) के कारण बल्कि एक निश्चित प्रयोजन और उस कठोर प्रथा की जिसने प्रेम और भाईचारे की ऐसी स्वीकृतियों को अस्वीकार और निषिद्ध किया है, असहनीय बेडि़यों को तोड़ने के लिए पूर्ण जानकारी और संकल्प से वहां एकत्र हुए थे।

उन्होंने अतिथियों को आश्वस्त किया कि अपने विद्वान अध्यक्ष डा. अम्बेडकर के योग्य मार्गनिर्देशन में लीग सदैव उन लोगों का स्वागत और सहायता करेगी, जो अद्वितीय साहस के साथ स्वयं तथा राष्ट्र को वर्तमान अमानवीय जाति-पीडि़त समाज से मुक्त करने के लिए आगे आएंगे।

‘‘संदेश’’ के संपादक श्री ए.बी. कोल्हाटकर, ने ऐसे समारोहों का महत्व इंगित करते हुए लीग के कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज ऐसी बालू

  1. द इंडियन नेश्नल हेराल्ड, दिनांक 6 मार्च, 1928 ।