खण्ड - I महाड सत्याग्रह पानी के लिए नहीं, बलिकु मानवाधिकारों की स्थापना के लिए - Page 60

43

रेत की घड़ी के समान है जहां ब्राह्मणों का वर्चस्व था किन्तु अब समय आ गया है जब उन्हें वे हिचक अन्य जातियों और विशेषकर तथाकथित अछूतों को स्थान देना चाहिए। उन्होंने आगे विश्वास व्यक्त किया कि अगर राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक सभी प्रकार की वर्तमान बुराईयों का उन्मूलन किया जाना है तो वह तथाकथित अछूतों में जन्म लेने वाले एक नए शिवाजी की सहायता के माध्यम से ही किया जा सकता है।

बंबई महाराष्ट्र युवा मंडल के सचिव श्री वी. बी. कार्णिक ने जाति प्रथा तथा धर्म और पंथ के आधार पर किए गए भेदभाव के समापन तथा अंतर्जातीय रात्रि भोजों के आयोजन और अंतर्जातीय विवाहों को प्रोत्साहित करने के लक्ष्य से उसके द्वारा पारित एक संकल्प की ओर ध्यान दिलाया और वचन दिया कि मंडल लीग, को जो पहले से ही ऐसे राष्ट्रीय कार्य के क्षेत्र में कार्यरत है, पूरे मन से सदैव अपना समर्थन देगा।

श्री एम. आर. मेनन ने कहा कि वे तथाकथित अछूतों के लिए महाद में सार्वजनिक तालाब से पेयजल के सर्वाधिक बुनियादी मानवाधिकार की प्राप्ति के लिए डॉ. अम्बेडकर को उनके द्वारा किए गए न्यायसंगत कार्य के लिए शुभेच्छा व्यक्त करने हेतु वहां गए थे।’’ ख्1,

‘‘सरकारी संकल्प के बावजूद अछूतों को वर्ष 1932 में पानी लेने की अनुमति नहीं दी गई, बम्बई सरकार ने नासिक जिले में दलित वर्गों की दशा की-जांच पड़ताल करने के लिए सिमिंगटन, आई. सी. एस. और जकेरिया मनियार को शामिल करते हुए एक समिति गठित की। रिपोर्ट के एक अध्याय से पता चला कि उस जिले में ग्यारह सौ से अधिक जिला स्थानीय बोर्ड के कुंए हैं, जिनमें से वर्ष 1923 के सरकारी संकल्प के बावजूद, अछूतों को पानी लेने की अनुमति नहीं दी गई थी।’’ ख्2,

इस बीच सवर्ण हिन्दूओं और दलित वर्गों के बीच विभिन्न न्यायालयों में कानूनी लड़ाई चल रही है। इन घटनाओं का सारांश निम्नलिखित है :-

^Fk ku
ft y
U; k; ky ;
l qu
v i hy

थाना, 20 मार्च

श्री बी. एन. संजना, जिला न्यायाधीश, थाना ने आज श्री वैद्य, उप-न्यायाधीश,

1.2. द इंडियन नेश्नल हेराल्ड, दिनांक 15 मार्च, 1928 ।कीर, पृष्ठ 197 ।