44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
महाद द्वारा पूर्व में चौदार तालाब के प्रयोग में महाद के अछूतों को रोकने के विरुद्ध दी गई अंतरिम निषेधाज्ञा को रद्द करने वाले उनके निर्णय के विरुद्ध महाद के पांडुरंग वामन धरप और अन्य द्वारा दाखिल अपील पर सुनवाई की।
जिला न्यायाधीश ने प्रत्यार्थियों को महाद सिविल न्यायालय में स्पृश्यों द्वारा दाखिल किए गए घोषणात्मक वाद का उपयोग करने से रोकते हुए अंतरिम निषेधाज्ञा मंजूर करते आदेश पारित किया।’’ ख्1,
कोलाबा, 3 मार्च-2 मार्च के बंबई क्रॉनिकल ने निम्नलिखित प्रकाशित किया : ‘‘बंबई में 26 फरवरी, रविवार को एक बैठक आयोजित की गई जिसमें लगभग 2000 लोगों ने भाग लिया। महाद में सत्याग्रह पुनः प्रारंभ करने का संकल्प लिया गया । सत्याग्रह समिति की शीघ्र ही बैठक हो रही है और निश्चित तारीख की घोषणा शीघ्र ही की जाएगी।’’ ख्2,
‘‘महाद में सत्याग्रह : ..................... पुनः प्रारंभ
पैरा 309 के अनुसार, कोलाबा, 17 मार्च हाल में कई रिपोर्टें आई हैं कि महाद सत्याग्रह 22 मार्च को पुनः प्रारंभ किया जाने वाला है; परंतु डॉ. अम्बेडकर, ने जिन्होंने इसे पुनः प्रारंभ करने के पूर्व पंद्रह दिनों की नोटिस देने का वचन दिया है, व्यक्तिगत रूप से उसे नकारा हैं’’। ख्3,
‘‘488, पैरा 52 के अनुसार, कोलाबा, 24 मार्च, उप-न्यायाधीश, महाद के चौदार तालाब से संबंधित आदेश के विरुद्ध फाइल की गई अपील में जिला न्यायालय, थाना ने तालाब से संबंधित मुकदमे का अंतिम निर्णय होने तक अछूतों को तालाब में प्रवेश करने से रोकते हुए एक आदेश पारित किया है।’’ ख्4,
महाद के उप-न्यायाधीश माननीय वी. आर. सर्राफ ने दिनांक 8 जून, 1931 को प्रतिवादियों डॉ. बी.आर. अम्बेडकर और अन्यों के पक्ष में निर्णय दिया, क्योंकि अपीलकर्ता सवर्ण हिन्दू तालाब के अपने स्वामित्व को सिद्ध नहीं कर सके। इस प्रकार चौदार तालाब सार्वजनिक तथा अछूतों के लिए भी खुला घोषित किया गया।
सवर्ण हिन्दू अपीलकर्ताओं ने निर्णय के विरुद्ध थाना के जिला न्यायालय में अपील दाखिल की। द्वितीय सहायक न्यायाधीश माननीय एस. एम. कोकनी ने दिनांक 30 1.2.3.4. बंबई सीक्रेट एब्सट्रेक्ट दिनांक 17 मार्च, 1928, पैरा 309 । बंबई सीक्रेट एब्सट्रेक्ट, दिनांक 31 मार्च, 1928, पैरा 428 । बंबई सीक्रेट एब्सट्रेक्ट, दिनांक 7 अप्रैल, 1928 ।द इंडियन नेश्नल हेराल्ड, दिनांक 22 मार्च, 1928 ।