खण्ड - I महाड सत्याग्रह पानी के लिए नहीं, बलिकु मानवाधिकारों की स्थापना के लिए - Page 63

46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

रूप में हकदार नहीं है, क्योंकि मुसलमान भी इसका प्रयोग कर सकते हैं। फिर भी यह दलील दी गई है कि अपीलकर्ताओं को स्वयं इसका प्रयोग करने और ‘अछूतों’’ को उससे अपवर्जित करने का अधिकार है और इस अधिकार को स्मरणातीत प्रथा पर आधारित बताया गया है।

विचारण न्यायाधीश का निष्कर्ष था कि वादियों ने ‘‘अछूतों’’ को तालाब के पानी का प्रयोग करने के अपवर्जन की दीर्घकालीन प्रथा (उन्होंने इसे स्मरणीय के रूप में वर्णित नहीं किया है) सिद्ध की है। तथापि उन्होंने निर्णय दिया कि यह प्रथा वादियों को कोई कानूनी अधिकार नहीं सौंपती क्योंकि ‘‘एक वर्ग द्वारा सार्वजनिक तालाब का मात्र प्रयोक्ता होना और दूसरे का अप्रयोक्ता होना कोई कानूनी अधिकार अथवा स्वामित्व का अधिकार नहीं देता।’’ अपील में सहायक न्यायाधीश ने इस निष्कर्ष की पुष्टि की कि हिन्दुओं ने यह सिद्ध नहीं किया है कि उन्हें ‘‘अछूतों’’ को अपवर्जित करने का कोई कानूनी अधिकार है। उन्होंने कुछ हद तक प्राधिकृत रिपोर्ट में प्रकटतः प्रकाशित न किए गए किन्तु वर्ष 1913 में मद्रास डब्ल्यू एन 247 और 18 इंडियन केसेज़ 979 में पाए जाने वाले एक मामले- सर सदाशिव अय्यर बनाम वैथीलिंगा के निर्णय का अवलम्ब लिया, किन्तु उनका मुख्य कारण यह प्रतीत होता है कि उन्होंने यह अभिनिर्धारित किया कि प्रथा को स्मरणातीत नहीं दर्शाया गया है।

चौदार तालाब नगर की बाहरी सीमा पर चार से पांच एकड़ के बीच में स्थित एक छोटी झील अथवा बड़ा तालाब है। यह चारों ओर से नगरपालिका की सड़कों से घिरा है, जिसके बाद हिन्दुओं (और बहुत थोड़े मुसलमानों) के घर हैं तथा इन घरों के स्वामियों के पास कई मामलों में तालाब, घाटों अथवा पानी में उतरने के लिए सीढि़यों के किनारे और किनारों के साथ-साथ मिट्टी से निर्मित बांधों पर भूमि की पट्टियों का भी स्वामित्व है। यहां कहीं भी आसपास ‘‘अछूतों’’ के कोई घर नहीं हैं। इस बात को छोड़कर कि स्वीकृत रूप से तालाब 250 वर्ष पुराना है, यह ज्ञात नहीं है कि तालाब कितना पुराना है। इसकी उत्पत्ति का कोई साक्ष्य नहीं है। यहां तक कि यह भी स्पष्ट नहीं हैं कि यह कृत्रिम है। विचारण न्यायाधीश का मत था कि यह ‘‘मिट्टी के अस्तर में एक प्राकृतिक खुदाई है, जिसकी निस्संदेह मानव एजेंसी द्वारा मरम्मत की गई है तथा नया रूप दिया गया है।’’ अगर ऐसा है और यह बिन्दु हमारे समक्ष जिरह के लिए विवादित नहीं था तो यह संभवतः सदियों पुराना है। जलापूर्ति मानसून से तथा कुछ प्राकृतिक झरनों से होती है। महाद शहर की जनसंख्या सात और आठ हजार के बीच है, जिसमें से 400 से भी कम ‘‘अछूत’’ हैं। नगरपालिका वर्ष 1865 में स्थापित हुई थी, परंतु इस मामले के रिकार्ड पर किसी तारीख को शहर के पूर्व इतिहास का अथवा उस समय जब स्थल पर सर्वप्रथम आबादी बसी थी, कोई साक्ष्य नहीं है।