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56 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बनाएगा, के प्रति उदासीन रहना ऐसी बात है जो मैं नहीं समझ सकता।’’

डॉ. अम्बेडकर कुछ हद तक उस विशेष उत्तर के बारे में निश्चित थे, जिसे पिछले दिन साक्षात्कार में श्री गांधी ने उन्हें दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने श्री गांधी को गोल मेज सम्मेलन में जाने के पूर्वानुमान में पूछा था कि क्या वे सम्मेलन के इस निर्णय को स्वीकार करने के लिए तैयार है कि दलित वर्गों को नए संविधान में एक अन्य अल्पसंख्यकों के समान राजनीतिक मान्यता दी जानी चाहिए, उन्हें राजनीतिक सुरक्षा और विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। डॉ. अम्बेडकर ने शिकायत की कि श्री गांधी ने उस दृष्टिकोण को बनाए रखने से मना कर दिया और कहा कि अगर वे गोल मेज सम्मेलन में गए तो वे उनसे कहेंगे कि सम्मेलन जो चाहे कर सकता है, परंतु उनकी राय में जहां तक दलित वर्गों का संबंध है यह सुझाव पूर्णतः घातक है।’’ ख्1,

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मुझे इस धर्म पर गर्व क्यों होना चाहिए

‘‘बेलार्ड पायर में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर को गांधी से यरवदा जेल में मिलने का अनुरोध करते हुए एक तार मिला। डॉ. अम्बेडकर ने गांधी को वापस तार भेजा कि वे दिल्ली से लौटने पर उनसे मिलेंगे। अगले दिन डॉ. अम्बेडकर को रंगून के डॉ. बा मॉं का एक तार मिला जिसमें कहा गया कि ‘‘वर्मा के पृथक्कतारोधी नेता अगले सप्ताह विधानसभा सत्र के दौरान भारतीय नेताओं से मिलने जा रहे हैं। वे आपके और अन्य नेताओं के साथ वर्मा की संवैधानिक स्थिति पर चर्चा करने के लिए चिंतित हैं। इसलिए, हम आपसे दिनांक 4 और 5 फरवरी को दिल्ली में प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने का अनुरोध करते हैं। कृपया वहां आपसे संपर्क करने में हमें समर्थ बनाने के लिए अपना दिल्ली का पता तार द्वारा भेज दें। यू. चिट हैंग, 80 हार्मिटेज रोड, रंगून - यू चिट हैंग और डा. बा मॉं को उत्तर दें।’’ देश के सभी भागों से डॉ. अम्बेडकर के कार्यालय में कई बधाई संदेश प्राप्त हुए थे। उनमें से एक दलित वर्गों और अपने गृह राज्य के लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए गोल मेज सम्मेलन में दिए गए निर्भीक वक्तव्य पर आभारपूर्वक अपने महान नेता को बधाई देते हुए एर्नाकुलम के थिया युवाजन समाज से था।

  1. द टाइम्स ऑफ इंडिया, दिनांक 17 अगस्त, 1931 ।