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डॉ. अम्बेडकर तत्काल वायसराय द्वारा बुलाए गए गोल मेज सम्मेलन में प्रतिनिधियों की औपचारिक बैठक में भाग लेने के लिए बंबई से दिल्ली रवाना हुए।
दिल्ली से उनकी वापसी के बाद उन्होंने गाँधी को तार भेजा कि वे उनसे 4 फरवरी को मिल पाएंगे। गांधी ने डॉ. अम्बेडकर को तार द्वारा 3 फरवरी को सूचित किया; ‘‘तार अभी-अभी प्राप्त हुआ, कल 12.30 बजे सही रहेगा - गाँधी’’। यह स्पष्ट है कि डॉ. अम्बेडकर दिल्ली में बर्मा के शिष्टमंडल से मुलाकात नहीं कर सके क्योंकि वे यरवदा जेल में 4 फरवरी, 1933 को गांधी से मिलना चाहते थे।
एस. एन. शिवतारकर, डोलास, उपासम, काउली, घोरपडे और केशवराव जेधे के साथ डॉ. अम्बेडकर ने 4 फरवरी को 12.30 बजे यरवदा जेल में प्रवेश किया। प्रसन्नचित्त मुद्रा में गांधी उठे और आगंतुकों का स्वागत किया। कुछ देर बाद, बातचीत मंदिर में प्रवेश के प्रश्न की ओर मुड़ गई। गाँधी ने डॉ. अम्बेडकर से डॉ. सुब्बारायन और रंगा अय्यर के विधेयक को समर्थन देने का अनुरोध किया। डॉ. अम्बेडकर ने सुब्बारायन के विधेयक से कुछ भी संबंध रखने से बिल्कुल अस्वीकार कर दिया, क्योंकि विधेयक में निंदा के रूप में अस्पृश्यता की चिंता नहीं की गई थी। उसमें केवल यह उल्लेख किया गया था कि अगर जनमत ने मंदिर में प्रवेश का पक्ष लिया तो मंदिरों को दलित वर्गों के लिए खोला जाना चाहिए। परंतु उसमें मंदिर में देवी-देवताओं की पूजा करने के उनके अधिकार के बारे में कुछ नहीं कहा गया।
उन्होंने गाँधी से कहा कि दलित वर्ग जाति प्रथा के क्रम में ‘‘शूद्र’’ नहीं होना चाहते और आगे कहा कि वे वास्तव में स्वयं को हिन्दू नहीं कह सकते। उन्होंने पूछा क्यों, उन्हें उस धर्म पर गर्व होना चाहिए, जिसने अवक्रमित स्थिति में होने की निंदा की है। अगर उस प्रथा को बने रहना है, तो उनके लिए मंदिर में प्रवेश के लाभों का कोई मतलब नहीं है।
गाँधी ने कहा कि उनके अनुसार जाति प्रथा खराब प्रथा नहीं है। उन्होंने अपनी बात जारी रखी। ‘‘स्पृश्य हिन्दुओं को अपने पापों का प्रायश्चित करने और हिन्दूवाद का शुद्धिकरण करने का अवसर दें। इस प्रश्न से तटस्थ नहीं रहें। सनातनियों और सरकार को इसका लाभ होगा। अगर यह सुधार होता है तो अछूत का समाज में उत्कर्ष होगा।’’
डॉ. अम्बेडकर गाँधी से असहमत थे। वे आश्वस्त थे कि अगर अछूतों ने आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक क्षेत्रों में प्रगति की तो मंदिर में प्रवेश स्वतः हो जाएगा।’’ ख्1,
- कीर, पृष्ठ 226-227 ।