खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 79

62 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

गया कि इस आयोग की सिफारिशों के आलोक में तैयार प्रस्तावों को वेस्टमिनिस्टर में संयुक्त चयन समिति को प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके समक्ष भारतीय साक्ष्यों की जांच की जाएगी।

वर्ष 1919 के अधिनियम में यथा घोषित भारतीय समस्या की पुनः जांच का कार्य प्रारंभ करने के लिए साइमन कमीशन अपने प्रथम दौरे पर आया और 3 फरवरी, 1928 को बंबई पहुंचा। इसकी अ-भारतीय पकृति ने लगभग सभी भारतीय दलों को अपमानित किया। कांग्रेस पार्टी ने प्रत्येक चरण और प्रत्येक रूप में कमीशन का बॉयकाट करने का निर्णय लिया। इसलिए, उसके आगमन पर, साइमन कमीशन का ‘‘वापस जाओ साइमन’’ के नारों वाली तख्तियों तथा काले झंडों से स्वागत किया। कांग्रेसियों ने राष्ट्र-व्यापी स्तर पर उग्र प्रदर्शन किए और कुछ स्थानों पर पुलिस को गोली चलानी पड़ी। कमीशन का काले झंडों से यह स्वागत बाद में भी किया गया जब वह वर्ष 1928-29 के शीतकाल के दौरान अपने दूसरे दौरे पर आया।

इस बीच कांग्रेस पार्टी द्वारा बुलाया गया सर्वदलीय सम्मेलन फरवरी और बाद में मई, 1928 में हुआ और इसने भारत के लिए स्वराज संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए पंडित मोतीलाल नेहरू के अधीन एक समिति नियुक्त की। नेहरू समिति ने जून से अगस्त, 1928 तक कार्य किया और संविधान का प्रारूप तैयार किया। *

इसका मुख्य लक्ष्य मुसलमानों का अतिक्रमण समाप्त करना था। जहां तक दलित और उत्पीडि़त वर्गों का संबंध है, नेहरू की रिपोर्ट ने कहा : ‘‘संविधान के लिए हमारे सुझावों में हमने विधानसभाओं में दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किए हैं। इसे केवल विशेष मतदाताओं अथवा नामांकन द्वारा किया जा सकता है। ‘‘परंतु चूंकि इन दोनों विधियों को हानिकारक और कमजोर माना गया; समिति ने कहा कि वे दोनों सिद्धांतों का प्रावधान नहीं करने जा रहे हैं। उन्होंने अवलोकन किया कि अधिकारों की उनकी घोषणा दलित वर्गों को प्रभावित कर रही सभी बुराइयों के लिए रामवाण होगी। [**] अछूतों की समस्या के प्रति कांग्रेस पार्टी की प्रवृत्ति तभी स्पष्ट होगी जब कोई यह देखता है कि कांग्रेस कार्य समिति सभी प्रमुख मुसलमान, पारसी, ईसाई, सिख, एंग्लो-इंडियन संगठनों और यहां तक कि गैर-ब्राह्मण संस्थाओं और द्रविड़ महाजन सभा को आमंत्रण जारी करती है, परंतु डॉ. अम्बेडकर के नेतृत्वाधीन दलित वर्गों की संस्थाओं और उस मामले के लिए किसी दलित वर्ग के संस्थान को नहीं। स्मरणीय है कि इसके दस वर्ष

* डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की टिप्पणी के लिए दिनांक 18 जनवरी, 1924 के ‘‘बहिष्कृत भारत’’ का ** संपादकीय देखें- संपादक ।सर्वदलीय सम्मेलन रिपोर्ट, 1928, पृष्ठ 59-60 ।