खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 81

64 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। [*]

डॉ. अम्बेडकर ने जो बुनियादी रूप से समिति से मतभेद रखते थे, उस रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं किया और स्वयं अपने विचार और सिफारिशें विहित कराते हुए दिनांक 17 मई, 1929 को पृथक रिपोर्ट प्रस्तुत की। * कर्नाटक के पृथक्करण के लिए मांग का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वे बंबई प्रेसीडेंसी से कर्नाटक के पृथक्करण के विरोधी हैं क्योंकि ‘‘एक प्रांत एक भाषा का सिद्धांत व्यवहार में लाने के लिए बहुत विस्तृत है। अगर सिद्धांत को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाना है तो उससे निर्मित किए जाने वाले प्रांतों की संख्या मेरी राय में अपनी अव्यवहार्यता दर्शाती है।’’ इसलिए मेरी राय है,- देशभक्त ‘‘डॉ. अम्बेडकर ने घोषित किया कि आज की सर्वाधिक महत्वपूर्ण आवश्यकता सर्वसाधारण में साझा राष्ट्रीयता की भावना सृजित करना है, यह भावना नहीं कि वे पहले भारतीय हैं और बाद में हिन्दू, मुसलमान अथवा सिंधी और कनरसे हैं, परंतु यह कि पहले और अंततः भारतीय ही हैं। अगर वह आदर्श हो तब यह समझा जाता है कि ऐसा कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए, जो स्थानीय देशभक्ति और सामूहिक सजगता को सख्त बनाए।’’

सिंध के पृथक्करण, जिसने उन दिनों अभूतपूर्व महत्व प्राप्त कर लिया था, के संबंध में, उन्होंने कहा कि यह एक वर्ग की मांग है, पांच प्रांतों में मुसलमानों की सांप्रदायिक बहुलता को एक राजनीतिक बहुलता बनाने के लिए तैयार स्कीम का भाग है। उन्होंने राष्ट्र को चेतावनी दी कि यह स्कीम, जैसा कि सतही तौर पर प्रतीत होता है, न तो अहानिकर है और न ही उतनी व्यर्थ। उन्होंने बल दिया कि स्कीम के पीछे का उद्देश्य प्रतिकार द्वारा न्याय और शांति बनाए रखने को शामिल करते हुए निस्संदेह अरूचिकर था और इसकी जड़ इस सिद्धांत से निकली थी कि शांति बनाए रखने का सर्वोत्तम तरीका युद्ध के लिए तैयार रहना है। अपने निष्कर्षों का समर्थन करने के लिए उन्होंने गांधीवादी राष्ट्रवादी मुसलमान नेता मौलाना आजाद द्वारा कलकत्ता में मुस्लिम लीग के सत्र में दिए गए भाषण का उद्धरण दिया, जिसमें मुसलमान नेता ने कहा, ‘‘पांच मुस्लिम प्रांतों की तुलना में नौ हिन्दू प्रांत होंगे और नौ प्रांतों में मुसलमानों से हिंदू जैसा ही व्यवहार करेंगे, वैसा ही व्यवहार पांच प्रांतों में मुसलमान हिन्दुओं से करेंगे। क्या यह बड़ी उपलब्धि नहीं थी? क्या यह मुसलमानों के अधिकारों का दावा करने के लिए प्राप्त एक नया हथियार नहीं है? यह गाँधीवादी राष्ट्रवादी मुसलमान नेताओं पर सर्चलाइट है।

डॉ. अम्बेडकर ने तब पृथक मतदाताओं की लिए मुसलमानों की मांग पर चर्चा की। उन्होंने उल्लेख किया कि यूरोप में विभिन्न लोग साझा मतदाता पर आपत्ति किए बिना एक दूसरे की समीपता में साझा सरकार के अधीन कैसे रहते हैं। उन्होंने मत