खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 82

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व्यक्त किया कि ‘‘यह पर्याप्त रूप से ज्ञात प्रतीत नहीं होता कि भारत ही एकमात्र देश नहीं हैं, जिसमें मुसलमान अल्पसंख्यक हैं। दूसरे देश हैं जिनमें उनकी समान स्थिति है। अल्बेनिया में मुसलमानों का बहुत बड़ा समुदाय है। बुल्गेरिया, ग्रीस और रूमानिया में वे अल्पसंख्यक हैं और यूगोस्लाविया तथा रूस में वे बहुसंख्यक हैं। क्या वहां मुसलमानों ने पृथक मतदाताओं के लाभ के बिना काम चलाया है, बल्कि उन्होंने उन्हें आश्वस्त प्रतिनिधित्व के निश्चित अनुपात के बिना काम चलाया है। इसलिए, भारत में मुसलमानों का मामला मेरी राय में, इस सीमा को पार कर जाता है और दृढ़ धारणा का वहन करने में विफल रहता है।’’ उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व, बुनियादी रूप से इतना गलत है कि इस मामले में भावना को छोड़ना एक बुराई को बनाए रखना होगा।

डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा कि ‘‘यद्यपि मैं कतिपय वर्गों के लिए विशेष प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के लिए प्रयासरत हूं, फिर भी मैं पृथक मतदाताओं के माध्यम से उनके प्रतिनिधित्व के विरुद्ध हूं। प्रादेशिक मतदाता और पृथक मतदाता दो चरम सीमाएं हैं, जिनसे प्रतिनिधित्व की किसी स्कीम से जो इस अप्रजातांत्रिक देश में सरकार का प्रजातांत्रिक रूप प्रारंभ करने के लिए तैयार की जाए, बचना चाहिए। इसका स्वर्णिम अर्थ आरक्षित सीटों के साथ संयुक्त मतदाताओं की प्रणाली है। उससे कम अपर्याप्त होगा, उससे अधिक अच्छे सरकार के उद्देश्य को विफल कर देगा।

उस समय विद्यमान सिद्धांतों और व्यक्तित्वों के परिप्रेक्ष्य में देखे जाने पर रिपोर्ट उतनी ही तर्कपरक थी जितनी कि देशभक्तिपूर्ण। इसमें संतुलन और स्थिरक भार दोनों था। जब इसे प्रकाशित किया गया, इसे डॉ. अम्बेडकर के चिरकालिक शत्रुओं, दुराग्रही आलोचकों और उग्र प्रेस से तत्काल प्रशंसा प्राप्त हुई। डॉ. अम्बेडकर को रातों-रात एक महान राजनीतिज्ञ, एक महान देशभक्त, अछूतों की गहरी कोयला

खान में एक हीरे, बिरले उपहार के रूप में एक राजनेता पाया गया। एक उल्का तथा प्रेरक के समान वे अपनी पीढ़ी के महान राजनीतिक बुद्धिजीवी के रूप में उभरे। इस प्रकार यह रिपोर्ट उन्हें देश की सक्रिय नियति में बांधती है। यह इतिहासकारों के लिए एक निश्चित मार्गनिर्देशक होगा।’’ ख्1,

जैसा ऊपर वर्णन किया गया है, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने स्वयं अपने विचारों और सिफारिशों को विहित करते हुए अपनी पृथक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। सिफारिशों का सारांश नीचे दिया गया है :

  1. कीर पृष्ठ 114-117 और 121-23 ।