खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 85

68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

लम्बे समय से विलुप्त साइमन कमीशन की रिपोर्ट मई, 1930 में सामने आई। कमीशन ने भारतीय राष्ट्रवाद और उसकी शक्तियों के अर्थ और उद्देश्य को नहीं माना। उसने भारतीय राजनीतिक दलों में किसी सहमत समझौते के अभाव में भारतीय चुनावों में पृथक मतदाता सूची को जारी रखने की सिफारिश की। कमीशन की राय थी कि नेहरू की रिपोर्ट एक सहमत समाधान नहीं थी।’’ ख्1,

भारत के भावी राजनीतिक संविधान पर चर्चा करने के लिए सरकार ने लंदन में गोल मेज सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया। यह आवश्यक था कि दलित वर्गों को इस संकटपूर्ण घड़ी में स्वयं के अधिकार पर दृढ़ रहना चाहिए और सरकार को स्पष्ट कर देना चाहिए कि भारत के भावी संविधान में उनके नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और गारंटी के लिए क्या व्यवस्था है। इस दृष्टि से डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के परामर्श से चर्चा के प्रयोजनार्थ भारत के विभिन्न प्रांतों से लोगों को एक साथ लाने का निर्णय लिया गया। तदनुसार, अखिल भारतीय दलित वर्ग कांग्रेस की बैठक दिनांक 8/9 अगस्त, 1930 को डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता में बुलाई गई। दिनांक 8 अगस्त, 1930 को डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने भारत के प्रस्तावित संविधान में दलित वर्गों को प्रदान की जाने वाले रक्षोपायों और गारंटियों को देखते हुए ब्रिटिश साम्राज्यवाद अथवा विश्व कार्य के परिप्रेक्ष्य में भारतीय समस्या पर वक्तव्य दिया।

जैसा कि घोषित किया गया था, ब्रिटिश सरकार ने भारत के लोगों की मांगे पूरी करने की दृष्टि से भारत का संविधान तैयार करने के लिए भारत, ब्रिटिश सरकार और ब्रिटिश राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए लंदन में एक गोल मेज सम्मेलन बुलाया।

गोल मेज सम्मेलन में नवासी सदस्य थे, जिनमें से सोलह सदस्य तीन ब्रिटिश दलों, के प्रतिनिधि, तिरेपन सदस्य गैर-सहयोगी कांग्रेस को छोड़कर विभिन्न हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले शिष्टमंडल के भारतीय सदस्य, और बीस सदस्य भारतीय रियासतों के थे। आमंत्रितों में सर तेज बहादुर सप्रू, एम. आर. जयकर, सर चिमनलाल सीतलवाड़ श्रीनिवास शास्त्री और सी. वाई. चिंतामणि सहित तेरह विख्यात हिन्दू उदारवादी नेतागण शामिल थे। मुसलमानों का प्रतिनिधित्व महामहिम आगा खान, सर मुहम्मद शफी, मुहम्मद अली जिन्ना और फजलुल हक कर रहे थे, जबकि सरदार उज्जल सिंह ने सिखों का प्रतिनिधित्व किया, डॉ. बी. एस. मुंज, हिन्दू महासभा, के.टी. पॉल, भारतीय ईसाई, अलवर, बड़ौदा, भोपाल, बीकानेर, कश्मीर, पटियाला और सर अकबर हैदरी, सर सी. पी. रामास्वामी अय्यर, सर मिर्जा, इस्मायल ने भारतीय रियासतों

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