खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 86

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का प्रतिनिधित्व किया। सर ए. पी. पात्रो और भास्करराव बहादुर श्रीनिवासन ने अन्य हितों का प्रतिनिधित्व किया; डॉ. अम्बेडकर और राव बहादुर श्रीनिवासन ने दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व किया। डॉ. अम्बेडकर ने दिनांक 6 सितम्बर, 1930 को वाइसराय के माध्यम से गोल मेज सम्मेलन का आमंत्रण प्राप्त किया। गोल मेज सम्मेलन सचमुच भारत और इंग्लैंड दोनों के इतिहास में एक महान घटना थी। विशेषकर अछूतों के लिए यह उनके इतिहास में एक युगान्तकारी घटना थी; क्योंकि इसी सम्मेलन में भारत का संविधान तैयार करने में परामर्श के अधिकार सहित उन्हें अन्य भारतीयों के साथ शामिल किया जा रहा था। उनकी आवाज दो हजार वर्षों के इतिहास में पहली बार और इससे भी अधिक उनकी मातृभूमि के शासन में गूंजने वाली थी।

डॉ. अम्बेडकर दिनांक 4 अक्तूबर, 1930 को एस. एस. वाइसरॉय ऑफ इंडिया द्वारा बंबई से लंदन के लिए रवाना हुए। देश में वातावरण उनके प्रस्थान के अनुकूल नहीं था। संपूर्ण देश में अशांति थी। कांग्रेसजन उन नेताओं से, जिन्होंने भारतीय समस्या को स्वयं अपने तरीके से हल करने में ब्रिटिश सरकार को सहयोग दिया था, घृणा कर रहे थे, बुरा-भला कह रहे थे और कोस रहे थे। स्थिति इतनी तनावपूर्ण और खतरे से परिपूर्ण थी कि डॉ. अम्बेडकर ने दिनांक 8 अक्तूबर को एडेन से अपने सचिव और विश्वासपात्र सहयोगी शिवतारकर को लिखा कि वे उनकी सुरक्षा के लिए बहुत चिंतित हैं। उन्होंने उनसे इच्छा व्यक्त की कि वे अपने कार्यों के प्रति सजग रहें और रात्रि के समय सभी कार्य करने से बचें। उन्होंने उनसे पार्टी के कार्यालय को लोहे की छड़ के साथ ताला लगाने और बंबई में दलित वर्ग के कतिपय नेताओं के, जो उनके संगठन से अनबन रखते थे, आवागमन पर नजर रखने के लिए कहा।

डॉ. अम्बेडकर ने इंग्लैंड में राजनीतिक वातावरण दलित वर्गों की समस्या के प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण पाया। अपने आगमन पर उन्होंने तत्काल दलित वर्गों की समस्या के संबंध में ब्रिटेन के महत्वपूर्ण राजनीतिक दलों के नेताओं से संपर्क करना प्रारंभ किया। फिर भी वे केबल द्वारा भारत से बंबई विधान परिषद में नामित नए सदस्यों की नई सूची और चौदार तालाब मामले में न्यायालय के निर्णय के बारे में जानने के लिए चिंतित थे।

दिनांक 12 नवम्बर, 1930 को पर्दा उठाया गया। गोल मेज सम्मेलन प्रारंभ होने पर ब्रिटिश जनता द्वारा गहरी दिलचस्पी दर्शायी गई। हाऊस ऑफ लॉर्डस, जो सम्मेलन स्थल था, का पहुंच मार्ग दर्शकों से भर गया। महामहिम सम्राट उपस्थित हुए। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि : ‘‘संप्रभु ने भारत की भूमि पर एक से अधिक बार यह ऐतिहासिक सभा बुलाई है किन्तु इससे पूर्व कभी भी ब्रिटिश और भारतीय