खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 95

78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

kx fj d rk
v fr Ø

सं. रा. सांविधियां, 9 अप्रैल, 1868 और 1 मार्च, 1875 के सिविल राइटस प्रोटेक्शन ऐक्ट अश्वेत लोगों के हित में उनके उद्वार के बाद पारित

‘‘जो कोई किसी व्यक्ति को सभी वर्गों के व्यक्तियों को लागू कानून के कारणों के सिवाय और छूताछूत की किसी पूर्व शर्त के बावजूद किसी भी आवासों लाभों, सुविधा, सराय, शैक्षणिक संस्थान, सड़क, पथ, गली, तालाब, कुंए और जल के अन्य स्रोतों, भूमि, वायु या जल पर सार्वजनिक वाहन, थियेटर अथवा सार्वजनिक मनोरंजन के अन्य स्थानों, रिजॉटों अथवा सुविधाओं, चाहे वे जनता के प्रयोग के लिए समर्पित या अनुरक्षित हों अथवा लाइसेंसशुदा हों, का पूर्ण उपभोग करने से वंचित करता है तो उसे ऐसी अवधि, के लिए जो पांच वर्षों तक सजा हो सकेगी किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माना देने के लिए भी दायी होगा।’’

(ख) दलित वर्गों के अधिकारों का शांतिपूर्ण उपयोग करने के रास्ते में रूढि़वादी व्यक्तियों द्वारा बाधा एकमात्र जोखिम नहीं है। बाधा का सबसे आम रूप सामाजिक बहिष्कार है। रूढि़वादी वर्गों के पास यह सर्वाधिक दुर्जेय हथियार है, जिससे वे दलित वर्गों की ओर से, अपने लिए अप्रियकर कार्यकलाप के किसी भी प्रयास को दबा देते हैं। वे अवसरों, उसके कार्यान्वयन और उनका जिन पर इसे लागू किया जाता है, भलीभांति उल्लेख, दलित वर्गों (अछूतों) और प्रेसीडेंसी में आदिम जनजातियों के शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक दशा की जांच करने और उनके उत्थान के उपायों की सिफारिश करने के लिए बंबई सरकार द्वारा वर्ष 1928 में नियुक्त समिति की रिपोर्ट में किया गया है। उस रिपोर्ट से उद्धरण निम्नलिखित हैं :-

Yys[k] vkSj djus x;k gSA nfyr Col2
ekft d Col3
Col1 Col2
दलित वर्ग और सामाजिक बहिष्कार

‘‘102 यद्यपि हमने सभी जन-सुविधाओं के लिए दलित वर्गों को उनका अधिकार दिलाने हेतु विभिन्न उपायों की सिफारिश की है फिर भी हमें भय है कि आने वाली दीर्घ अवधि तक उनके प्रयोग में उनके सामने कठिनाईयां आएंगी। पहली कठिनाई रूढि़वादी वर्गों द्वारा उनके विरुद्ध खुली हिंसा का भय है। उल्लेखनीय है कि दलित वर्ग प्रत्येक गांव में अल्पसंख्यक है, जिसके विरुद्ध रूढि़वादियों की अत्यधिक बहुसंख्या है, जो किसी भी कीमत पर दलित वर्गों द्वारा किसी संभावित अतिक्रमण से अपने हितों और सम्मान के संरक्षण के लिए कटिबद्ध हैं। पुलिस द्वारा मुकदमा चलाए