खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 97

80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

शास्तियों भारत शासन अधिनियम, 1919 के भाग- XI में निम्नलिखित धाराएं जोड़ी जानी चाहिएं।

बहिष्कार का अपराध परिभाषित

(i) किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे का बहिष्कार करना समझा जाएगा, जो -

यह और निम्नलिखित कानूनी प्रावधान मामले की आवश्यकता को उपयुक्त बनाने के लिए कुछ परिवर्तनों सहित बर्मा एन्टी बायकाट ऐक्ट, 1922 से सावयव लिए गए हैं। (क) किसी मकान अथवा भूमि को किराए पर देने या प्रयोग करने अथवा अधिभोग करने, या किसी अन्य व्यक्ति के साथ व्यवहार करने, पर देने का कार्य करने या व्यवसाय करने, अथवा उसे कोई सेवा देने या उससे लेने से इंकार करता है, अथवा उन शर्तों, पर जिनऐसी बातें व्यवसाय के सामान्य इंकार अनुक्रम में की जानी चाहिए, उक्त बातों में से कोई करने से अस्वीकार करता है, अथवा

(ख) समाज में ऐसी मौजूदा रूढि़यों को ध्यान में रखते हुए जो साधारणतया ऐसे व्यक्ति के पास सामान्यतया कायम, संविधान में घोषित किहीं मूल अधिकारों अथवा नागरिकता के अन्य अधिकारों से असंगत नहीं हैं, अपने ऐसे सामाजिक, वृत्तिक अथवा कारोबार के संबंधों से विरत रहता है, अथवा

(ग) किसी तरह ऐसे अन्य किसी व्यक्ति को, अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग करते हुए नुकसान पहुंचाता है, रूष्ट करता है अथवा उसमें हस्तक्षेप करता है।

बहिष्कार करने के लिए दंड

जो कोई किसी व्यक्ति द्वारा ऐसे कृत्य करने, जिसे करने का वह कानूनी रूप से हकदार था अथवा ऐसे कृत्य का लोप करने, जिसे लुप्त करने के लिए वह कानूनी रूप से हकदार या अथवा किसी व्यक्ति को ऐसा कृत्य करने के, जिसे वह करने के लिए कानूनी रूप से अथवा लोप करने के जिसे लुप्त करने का वह हकदार था, आशय से, अथवा ऐसे व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक रूप से उसकी ख्याति या संपत्ति अथवा उसके व्यवसाय या आजीविका के साधन को नुकसान पहुंचाने के आशय से ऐसे व्यक्ति या किसी व्यक्ति का जिसमें ऐसा व्यक्ति हितबद्ध है, बहिष्कार करता है तो उसे दोनों प्रकार के कारावास को दंड दिया जाएगा जिसकी अवधि सात वर्ष हो सकेगी अथवा जुर्माने अथवा दोनों से दंडित किया जाएगा।

परन्तु इस धारा के अधीन कोई अपराध किया गया नहीं माना जाएगा, यदि न्यायालय का समाधान हो जाता है कि अभियुक्त व्यक्ति ने किसी व्यक्ति के बहकावे