82 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(ii) व्यवसाय की प्रतिस्पर्धा के सामान्य अनुक्रम में कोई कृत्य करना।
बहिष्कार नहीं है।
टिप्पणी - ये सभी अपराध संज्ञेय अपराध समझे जाएंगे।
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शर्त संख्या
भेदभाव से संरक्षण
दलित वर्ग को या तो विधान द्वारा अथवा भविष्य में किए जाने वाले कार्य आदेश द्वारा भेदभाव का घोर भय रहता है। इसलिए वे बहुसंख्यक शासन के अधीन स्वयं को लाने की सहमति नहीं दे सकते जब तक कि विधानमंडल अथवा कार्यपालिका द्वारा दलित वर्गों के साथ किसी द्वेषजनक भेदभाव करना कानून के अनुसार असंभव नहीं बनाया जाता है।
इसलिए यह प्रस्तावित है कि भारत के संवैधानिक कानून में निम्नलिखित कानूनी प्रावधान किए जाएं :-
‘‘भारत में कोई विधानमंडल अथवा कार्यपालिका कोई विधि बनाने अथवा कोई आदेश, नियम या विनियम जारी करने के लिए सक्षम नहीं होगी, जो भारत डोमिनियन के क्षेत्राधिकार के अधीन सभी क्षेत्रों में छूआछूत की किसी पूर्व शर्त पर ध्यान दिए बिना, राज्य के लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करता हो,
(1) संविदा करने और उसे प्रवर्तित करने पर मुकदमा चलाने पक्षकार बनने और साक्ष्य देने, स्थावर और वैयक्तिक संपत्ति विरासत में लेने, खरीदने, पट्टे पर देने, बेचने, धारित करने और हस्तांतरित करने, के लिए,
(2) ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के सिवाय जो राज्य के निवासियों के सभी वर्गों का विधिवत और पर्याप्त प्रतिनिधित्व करने के लिए आवश्यक हों और सैन्य रोजगार में तथा सभी शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए पात्र होने के लिए,
(3) प्रत्येक प्रजाति, वर्ग, जाति, वर्ण और धर्म के सभी लोगों पर समान रूप से लागू ऐसी शर्तों और परिसीमाओं को छोड़कर, सभी आवासों, फायदों सुविधाओं, शैक्षणिक संस्थानों, सराय, नदियों, प्रपातों, कुंओं, तालाबों, सड़कों, मार्गों, भीतरी सड़कों, भूमि, वायु और जल पर सार्वजनिक वाहनों, थियेटर और सार्वजनिक आश्रम या मनोरंजन के अन्य स्थानों का पूर्ण और बराबर उपभोग करने के लिए हकदार होने के लिए,
(4) जनसाधारण अथवा समान आस्था और धर्म के लोगों के लिए समर्पित