31. भारत और ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल - Page 103

84 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कोई सामान्य नागरिकता नहीं है। एक स्वतंत्र उपनिवेश का नागरिक अन्य सभी उपनिवेशों का नागरिक नहीं है। दरअसल राष्ट्रमण्डल तो राष्ट्रमण्डल नागरिकता का विरोधी है। वह इस बात पर जोर देता है कि प्रत्येक उपनिवेश स्वतंत्र होगा कि उसका नागरिक कौन है और यह कहने के लिए भी स्वतंत्र होगा कि किसी दूसरे उपनिवेश का नागरिक उसका नागरिक नहीं होगा। हमारा सरोकार यहां तीसरे दोष से है। क्या हमारा प्रस्ताव इस प्रणाली में कोई बदलाव कर सकता है? जहाँ तक मेरा मत है, यह कोई बदलाव नहीं कर सकता है। स्वतंत्र उपनिवेशों को अभी भी यह परिभाषित करने का अधिकार है कि कौन उनका नागरिक है और कौन नहीं है; और जैसा पहले होता आया है वैसे ही भविष्य में भी वहाँ रहने वाले भारतीयों को वे नागरिकता के अधिकार से वंचित कर देंगे।

  1. अतः स्वतंत्र उपनिवेशों की तुलनात्मक स्थिति की दृष्टि से भारत को इस बदलाव का कोई फायदा या नुकसान नहीं है। परन्तु भारत को अन्य स्वतंत्र उपनिवेशों के मामले पर विचार करने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह माना जा सकता है कि वे अपनी नागरिकता भारतीय लोगों और भारत को नहीं देंगे अतः उन्हें भी भारत की नागरिकता के लिए बुलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। परन्तु भारत और यूनाइटेड किंगडम का मामला अलग है। क्योंकि उसके नागरिकता अधिनियम के अंतर्गत वह भारतीय लोगों को अपना नागरिक मानने के लिए तैयार है। वह भारत से भी उसके नागरिकों को भारत का नागरिक मानने की अपेक्षा करता है। परन्तु क्या भारत ऐसा करना चाहता है? मुझे दृढ़ विश्वास है कि भारत ऐसा नहीं कर सकता। इसका कारण भी स्पष्ट है। भारत और ग्रेट ब्रिटेन के बीच एक बार सामान्य नागरिकता लागू होने पर हम ब्रिटिश और भारतीय के बीच भेद करने में समर्थ नहीं हो सकेंगे क्योंकि दोनों ही हमारे नागरिक होंगे। ऐसे तो हम फिर से गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट, 1935 धारा 111 से 121 में निहित प्रावधानों को लागू कर देंगे जिसमें ब्रिटिश और भारतीय नागरिकों के बीच ऐसे किसी भेदभाव का निषेध किया गया है, जिससे हम बचने का प्रयास करते रहे हैं। अतः, यह अत्यंत स्पष्ट है कि राष्ट्रमंडल नागरिकता भारत को राष्ट्रमंडल का सदस्य बनाने की एक खतरनाक विधि है।

  2. इस प्रस्ताव में शामिल खतरों के अलावा क्या भारत प्रारूप संविधान में निहित प्रावधानों, जिनका हवाला मैंने पहले ही दिया है, के साथ-साथ इसे राष्ट्रमंडल से स्वयं के संबंध के रूप में स्वीकार कर सकता है? राष्ट्रमंडल नागरिकता के समाधान की सिफारिश इस आधार पर की गई है कि इसमें सम्राट का कहीं कोई उल्लेख नहीं आता और इसके द्वारा गणराज्य भी राष्ट्रमंडल के सदस्य बने रहने में समर्थ हैं। परंतु क्या ऐसा है? इस मुद्दे का निर्धारण करने के लिए हमें सबसे पहले