31. भारत और ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल - Page 104

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यह जान लेना चाहिए कि राष्ट्रमंडल नागरिक से क्या तात्पर्य है। नागरिकता अब अधिकार और कर्त्तव्य का विषय है। यदि प्रश्न पूछा जाए कि राष्ट्रमंडल के एक नागरिक के अधिकार क्या-क्या हैं तो हम आसानी से उत्तर दे सकते हैं। राष्ट्रमंडल के एक नागरिक के अधिकार वही होते हैं जो उसे राष्ट्रमंडल विशेष के कानून द्वारा प्रदत्त हैं, जिनका वह नागरिक है। लेकिन राष्ट्रमंडल के एक नागरिक के अधिकार एवं कर्त्तव्य क्या हैं? यदि यह कोई नई और मूल अवधारणा है और इसमें कोई तथ्य है तो इस प्रश्न का उत्तर हमें राष्ट्रीयता को परिभाषित करने वाले ब्रिटिश और कनाडा दो अधिनियमों में मिलना चाहिए। दोनों अधिनियम इस विषय पर मौन हैं। इस प्रकार एक राष्ट्रमंडल नागरिक एक ऐसा बोगस व्यक्ति है जिसके पास न खाने के लिए कुछ है और न कुछ पाने के लिए।

  1. राष्ट्रमंडल नागरिक शब्द एक खोखला शब्द है। इसमें कोई कानूनी तत्व नहीं है। इसकी तुलना में यूनाइटेड स्टेट्स की नागरिकता कहीं यथार्थपरक है, जो इसके राज्यों की नागरिकता से भिन्न है। इसमें कतिपय विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां है। परन्तु राष्ट्रमंडल नागरिक से ऐसा कुछ भी जुड़ा नहीं है। तब राष्ट्रमंडल नागरिक शब्द प्रयुक्त क्यों किया जाता है? इससे वास्तव में क्या अभिप्रेत है? ब्रिटिश राष्ट्रीयता अधिनियम, जिसका उल्लेख पहले किया गया है की धारा 1 का संदर्भ लेने से ज्ञात होता है कि यह पुराने “ब्रिटिश प्रजा” शब्द का विकल्प मात्र है। यह जानते हुए, क्या भारत इस समाधान को स्वीकार कर सकता है? यदि एक राष्ट्रमंडल नागरिक ब्रिटिश नागरिक होने का ही दूसरा नाम है तो उसकी निष्ठा भी सम्राट के प्रति होनी चाहिए। और जैसा कि मैंने पहले ही उल्लेख किया है सम्राट के प्रति निष्ठा गणराज्य से सुसंगत नहीं है। अतः, यह स्पष्ट है कि यदि भारत को एक गणराज्य बनना है तो राष्ट्रमंडल नागरिकता का यह समाधान वह स्वीकार नहीं कर सकता।
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  1. अपने प्रारूप संविधान को ध्यान में रखते हुए भारत राष्ट्रमंडल में रहने के लिए सम्राट के प्रति सत्यनिष्ठा अथवा राष्ट्रमंडल नागरिकता के तरीके को स्वीकार नहीं कर सकता। हमें कोई और तरीका ढूंढना होगा। मेरे विचार से आयरलैण्ड के मुद्दे के समाधान के लिए डी. वलेरा द्वारा 1921 में की गई कार्रवाई का अनुसरण करना एक उचित तरीका होगा। जिन लोगों ने इस विवाद के बारे में पढ़ा है, वह जानते होंगे कि श्री डी. वलेरा यह नहीं चाहते थे कि आयरलैण्ड राष्ट्रमंडल का स्वतंत्र उपनिवेश के प्रतीकों वाला एक घटक देश बने, जिनका उल्लेख इस नोट के पैराग्राफ 4 में किया गया है। वह आयरलैण्ड को राष्ट्रमंडल के एक घटक देश से