31. भारत और ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल - Page 105

86 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

भिन्न राष्ट्रमंडल का एक सहयोगी देश बनाना चाहते थे। राष्ट्रमंडल के सहयोगी देश की अपनी अवधारणा का विवेचन उन्होंने एक दस्तावेज में किया है, जिसे आयरिश बंदोबस्ती के इतिहास में दस्तावेज नं. 2 के रूप में जाना जाता है।

  1. मैं सुलभ सन्दर्भ और सहयोगी देश से श्री डी. वलेरा का क्या तात्पर्य था, यह बताने के लिए उक्त दस्तावेज के कुछ उद्धरण नीचे दे रहा हूं :-
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  1. आयरलैण्ड के विधायी, कार्यकारी और न्यायिक प्राधिकार केवल आयरलैण्ड की जनता से व्युत्पन्न होंगे।
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  1. सामान्य सरोकार के प्रयोजनार्थ आयरलैण्ड ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के देशों अर्थात ग्रेट ब्रिटेन साम्राज्य, कनाडा स्वतंत्र उपनिवेश, आस्ट्रेलिया राष्ट्रमंडल, न्यूजीलैंड स्वतंत्र उपनिवेश तथा दक्षिण अफ्रीकी संघ के साथ सम्बद्ध रहेगा।

  2. सहयोगी के रूप में कार्य करते समय आयरलैण्ड के अधिकार, दर्जा और विशेषाधिकार ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के घटक देशों को प्रदत्त अधिकारों, दर्जे और विशेषाधिकारों से किसी भी रूप में कम नहीं होंगे।

  3. “सामान्य सरोकार” से संबंधित मामलों में रक्षा, शांति एवं युद्ध, राजनैतिक संधियां और वे सभी मामले शामिल होंगे जिन्हें अब ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के देशों के बीच सामान्य सरोकार समझा जाता है और इन मामलों में अनेक सरकारों द्वारा किए गए निर्धारण के अनुसार विचार-विमर्श पर आधारित “आयरलैण्ड और ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के देशों के बीच” एकीकृत कार्रवाई की जाएगी।

  4. आयरलैण्ड के ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के देशों से सम्बद्ध होने के कारण आयरलैण्ड का कोई नागरिक इन देशों में ऐसी किसी निर्योग्यता का सामना नहीं करेगा, जिसका सामना ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के घटक देशों में से किसी देश के नागरिक को नहीं करना पड़ता और इन देशों के नागरिकों की पारस्परिक रूप से यही स्थिति आयरलैण्ड में होगी।

  5. सहयोग के प्रयोजनार्थ आयरलैण्ड ब्रिटेन के महाराजाधिराज को सहयोग के प्रमुख के रूप में मान्यता देगा।

राष्ट्रमंडल के साथ संबंध स्थापित करने का एक और नया तरीका है।