31. भारत और ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल - Page 107

88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

भविष्य ने नये संविधान के अंतर्गत “आयर” अथवा “आयरलैण्ड” कहा जाएगा - ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के राष्ट्रों के सदस्य के रूप में उसकी मूलभूत स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।

“यूनाइटेड किंगडम की हिज मजेस्टी सरकार ने सुनिश्चित कर लिया है कि कनाडा में हिज मजेस्टी सरकार, आस्ट्रेलिया राष्ट्रमंडल, न्यूजीलैंड तथा दक्षिण अफ्रीकी संघ भी नए संविधान को स्वीकार करने हेतु तैयार हैं।”

राष्ट्रमंडल में एक सदस्य के रूप में आयरलैण्ड की स्वीकार्यता को देखते हुए ब्रिटिश सरकार भारत के साथ भी वही व्यवहार करने के लिए बाध्य है, विशेष रूप से जब दोनों मामलों में शर्तें एक समान हैं। न तो ब्रिटिश सरकार और न ही स्वतंत्र उपनिवेश हमसे सहयोगी सदस्यता की मांग कर सकते हैं और यही हमारे लिए जरूरी भी है।

V. नए प्रस्ताव की प्रकृति एवं फायदे

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नए प्रस्ताव की प्रकृति एवं फायदे

  1. इस नए प्रस्ताव से राष्ट्रमंडल दो प्रकार के देशों से मिलकर बनेगा - (1) घटक देश, और (2) सहयोगी देश। घटक देश पुराने उपनिवेश होंगे, जिनका प्रमुख सम्राट था। सहयोगी देशों में भारत जैसे देश शामिल होंगे जो सम्राट को अपने प्रमुख के रूप में मान्यता नहीं देते। इस प्रस्ताव के दो फायदे हैं। इससे भारत एक गणराज्य बना रह सकता है, जिसका संकल्प उसने लिया है। यह भारत और राष्ट्रमंडल दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े पारस्परिक लाभ उठाने में समर्थ बनाता है। और अंत में, यह प्रस्ताव भारत को राष्ट्रमंडल नागरिकता के प्रस्ताव को मान्यता प्रदान करने के खतरे से भी बचाता है, जिसमें व्यापार और वाणिज्य से संबंधित मामलों में भारतीयों और ब्रिटिशों से समान व्यवहार किया जाना शामिल है, जिसके विरुद्ध भारत लड़ता रहा है।
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  1. भारत को राष्ट्रमंडल का सहयोगी सदस्य बनाते समय हमें दो बातों को स्पष्ट करने से चूकना नहीं चाहिए। एक तो यह कि भारत चाहे राष्ट्रमंडल का सदस्या हो या न हो, उसे राष्ट्रमंडल की इच्छाओं पर निर्भर नहीं बने रहना चाहिए। इसका निर्धारण भारत द्वारा ही इस संबंध में की गई किसी घोषणा से किया जाना चाहिए। जिस किसी ने आयरलैण्ड के मामले का अध्ययन किया है वह इस स्पष्टीकरणों का महत्व समझेगा। आयरलैण्ड को तब भी स्वतंत्र उपनिवेश बनाए रखा गया जब उसके द्धारा अपने संविधान में यह स्पष्ट किया गया था कि वह स्वतंत्र उपनिवेश नही रहना चाहिए। आयरलैण्ड को राष्ट्रमंडल से इस आधार पर बाहर रहने नहीं