94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
“कॉन्स्यूएट्यूडो” अथवा प्राचीन रिवाज से भेद करने के लिए यह शब्द प्रयुक्त होता था। संविधान का आधुनिक अर्थ इसे 1610 में जाकर मिला, जिसके अनुसार इसका तात्पर्य है कानून के अनुसार परिभाषित नागरिक सरकार की योजना; अथवा दूसरे शब्दों में कहें, तो राज्य का कानूनी कार्यढांचा।
सौ वर्ष बाद संविधान शब्द एक अतिरिक्त और विशेष अर्थ में प्रयुक्त होते हुए देखा गया जो राज्य के कानूनी कार्यढांचे से कहीं बढ़कर है। इसका संकेत बोलिंगब्रोक ने दिया जिसने 1733 में किए गए अपने लेखन में कहा कि :-
“जब हम औचित्य और सुस्पष्टता से बात करते हैं, तब संविधान से हमारा
आशय उन कानूनों, संस्थाओं और रिवाजों से है, जिन्हें तर्क पर आधारित
किसी सिद्धांत से प्राप्त किया गया है, जो लोगों की भलाई के लिए
निर्देशित हैं, जिनसे मिलकर सामान्य प्रणाली बनती है, जिसके अनुसार
समाज शासित होने हेतु सहमत हुआ है।”
संविधान शब्द का यह अर्थ भी संविधान शब्द के आधुनिक अर्थ से कमतर है। आज इस शब्द से किसी राज्य में सरकार के विभिन्न अंगों की शक्तियों एवं कर्त्तव्यों को निर्धारित करने वाला मूल कानून अभिप्रेत है जिसके वह अधीन है। संविधान शब्द का अर्थ निरूपण थॉमस पाइन ने किया, जिन्होंने कहा था कि :-
“संविधान सरकार द्वारा किया गया कार्य नहीं बल्कि लोगों द्वारा सरकार
बनाने का कार्य है और संविधान रहित सरकार अधिकार रहित शक्ति
के समान है।”
तो, संविधान शब्द के अर्थ का यह विवेचन है।
संवैधानिक कानून का स्वरूप और दायरा क्या है? संवैधानिक कानून का स्वरूप जानने का एक आसान तरीका है इसके दायरे को समझ लेना। इसलिए बेहतर होगा कि सबसे पहले इसके दायरे को समझ लिया जाए। विश्वभर में जहाँ कहीं लोकतंत्र है, संवैधानिक कानून के दायरे में राज्य अपने नागरिकों से जिन अधिकारों का दावा करता है, उससे संबंधित सभी मामले शामिल हैं अर्थात (1) किसी कानून को सब लोगों पर बाध्यकारी बनाना, (2) कानून का प्रवर्तन कराना और (3) नागरिकों द्वारा राज्य से दावा किए गए कानून और अधिकारों की व्याख्या करना। यदि यह एक मिलाजुला राज्य अर्थात एक संघीय राज्य है, तो संवैधानिक कानून के दायरे में उपर्युक्त मामलों के अलावा संघ को बनाने वाले राज्य तंत्र तथा अन्य राज्य तंत्रों से संबंधित, कानूनी, कार्यकारी एवं वित्तीय मामले भी शामिल होंगे।