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अंग्रेजी को किसी भी कीमत पर बनाए रखें
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औरंगाबाद, 13 जुलाई, 1953
“भारत के पूर्व कानून मंत्री डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने किसी भी कीमत पर महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी को शिक्षा के माध्यम के रूप में बनाए रखने की पैरवी की है।
एक बातचीत में डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि अंग्रेजी सभी भाषाओं में सबसे समृद्ध है। उन्होंने कहा कि “मुझे नहीं लगता कि स्कूलों और कालेजों में हिन्दी सहित किसी भारतीय भाषा का प्रयोग अंग्रेजी के स्थान पर किया जा सकता है।”
डॉ. अम्बेडकर औरंगाबाद की पीपुल्स एजुकेशन सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि वह औरंगाबाद कॉलेज में हिन्दी या किसी क्षेत्रीय भाषा को शिक्षा का माध्यम नहीं बनाएंगे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी ही शिक्षा का माध्यम रहेगी।
भारतीय भाषाओं की बात करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि हिन्दी का स्थान कोई अन्य भाषा नहीं ले सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिन्दी भाषा में विस्तार की क्षमता होने के कारण इसका चयन किया गया था।
लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दी में “साहित्य और गहनता” का अभाव है, जबकि अंग्रेजी में ये दोनों मौजूद हैं।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि हिन्दी को समृद्ध बनाने के लिए एक हिन्दी अकादमी का गठन किया जाना चाहिए जिसमें विद्वानों को शामिल किया जाए और शब्दकोष तैयार किया जाना चाहिए - यूपीआई।” ख्1,
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1 द नेशनल स्टैंडर्ड, दिनांक 4 जुलाई, 1953