38. सार्वजनिक मामलों में एकतरफा यातायात - Page 123

104 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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पूना से प्रकाशित केसरी और मराठा के सम्पादकों ने डॉ. अम्बेडकर को दिनांक 5.7.1954 को पत्र भेजे थे, जिसका उत्तर डॉ अम्बेडकर ने दिनांक 15.7.1954 को भेजा था। डॉ अम्बेडकर का जवाब नीचे दिया गया है - सम्पादक।

26, अलीपुर रोड,

दिल्ली,

15 जुलाई, 1954 सेवा में,

सम्पादक,

केसरी और मराठा कार्यालय

पूना-2

प्रिय महोदय,

आपका दिनांक 5 जुलाई, 1954 का पत्र मुझे प्राप्त हुआ जिसमें कुछ पूछे गए प्रश्नों पर मुझे अपने विचार बताने के लिए कहा गया था। मुझे खेद है कि बम्बई में रहते हुए मैं पत्र का उत्तर नहीं भेज सका क्योंकि मैं कॉलेज के कार्यों में अत्यंत व्यस्त था। इसके तुरंत बाद मुझे मिलिट्री स्टाफ कॉलेज में भारतीय संविधान पर भाषण देने के लिए कुन्नूर रवाना होना पड़ा था। मैं कल ही वहां से लौटा हूँ।

इस समय सार्वजनिक मामलों में एक ही व्यक्ति के यातायात के कारण विदेश से जुड़े मामलों में दिलचस्पी बनाए रखना बहुत कठिन हो गया है क्योंकि देश ऐसा कोई विचार सुनने के लिए तैयार नहीं है जो प्रधानमंत्री जी के विचार से न मिलता हो। मेरे साथ भी कमोबेश ऐसा ही है और मेरा कहना है कि विदेशी मामलों में मैं एक समय जितनी दिलचस्पी लेता था उतनी दिलचस्पी लेना अब मैंने बंद कर दिया है। वस्तुस्थिति को देखते हुए मैं महसूस करता हूँ कि आपके द्वारा उल्लिखित विषय पर टिप्पणी करने में मैं सक्षम नहीं हूँ।

सादर,

आपका,

(ह/-)

बी. आर. अम्बेडकर

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पुनर्मुद्रण : खैरमोडे, खण्ड 11, पृ. 69