39. बाढ़ नियंत्रण परमाणु शक्ति का उपयोग - Page 124

105

Col1 Col2
37
बाढ़ नियंत्रण
परमाणु शक्ति का उपयोग
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर

भारत में आई बाढ़ और बाढ़ नियंत्रण की विधियों के बारे में हमने हाल ही में काफी कुछ सुना और पढ़ा है। वायसराय की कार्यकारी परिषद का सदस्य होने के नाते सिंचाई का प्रभार मेरे पास था। तब मैंने सिंचाई और जहाजरानी आयोग नामक एक विभाग का गठन किया था, जिन्हें मेरे ख्याल से अब नदी नियंत्रण बोर्ड, केन्द्रीय जल विद्युत आयोग आदि, नाम दिए गए हैं।

इन संगठनों ने बाढ़ नियंत्रण हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं जिनके बारे में समय-समय पर समाचार आते रहते हैं। उम्मीद की जाती थी कि इन संगठनों द्वारा समस्या का कोई न कोई निर्णायक समाधान ढूंढ लिया जाएगा। किन्तु अब हम यह पाते हैं कि चाहे जो भी प्रस्ताव आए हों, उनका कार्यान्वयन बाढ़ पर नियंत्रण करने में पूर्णतः असफल रहा है। शिलांग से भी यह सूचना आई है कि क्या-क्या कदम उठाकर ब्रह्मपुत्र की बाढ़ पर नियंत्रण किया जा सकता है, इंजीनियरों के लिए भी यह बता पाना कठिन या लगभग असंभव हो रहा है और प्रयोग के तौर पर 14,00,000 रुपये की लागत से एक पुश्ता बनाया गया था और वह भी बाढ़ में बह गया। तटबंध

यह भी सुनने में आया है कि सरकार ने नदियों पर बांध बनाकर बाढ़ नियंत्रण के नए विचार को त्याग दिया है और तटबंध मजबूत करने का पुराना तरीका अपनाया है और इसके लिए बड़े पैमाने पर लोगों को काम पर लगाकर उनकी सहायता ली जा रही है।

इस संबंध में मैं भारत सरकार और इस मामले से जुड़े इंजीनियरों का ध्यान एक प्रस्ताव की ओर दिलाना चाहता हूं, जिसे एक विद्वान इंजीनियर ने पेश किया है और यह बॉम्बे कंटेम्प्ररी के दिनांक 10 सितम्बर, 1954 के अंक में “एटॉमिक साइन्स टू द रेस्क्यू रिटन बाई ऑब्जर्वर” शीर्षक से प्रकाशित हुआ है।