106 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जिस प्रस्ताव पर मैं ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूँ वह एक सरल प्रस्ताव है अर्थात बाढ़ नियंत्रण के लिए परमाणु शक्ति का प्रयोग। ‘‘ऑब्जर्वर’’ समाचार पत्र पढ़ते ही मैं इस प्रस्ताव से बहुत प्रभावित हुआ और मैंने इसके लेखक के बारे में उनसे पूछताछ की। मुझे ज्ञात हुआ कि यह लेखक श्री सी.एस. पिल्लै हैं। मुझे पता चला कि वह तीस वर्षों से सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हैं और ऐसे कार्य का उन्हें काफी कुछ तजुर्बा है। उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति तक परमाणु अनुसंधान का विकास होने तक पुश्तो, तटबंधों और पलस्तर विज्ञान में अत्यंत सामान्य विधियों का प्रयोग किया जाता रहा है। लेकिन नदी नियंत्रण विज्ञान में हाल ही में हुई प्रगति के परिणामस्वरूप नई-नई बातें और तकनीकें सामने आई हैं, जिन्हें साल दर साल विनाश लीला लेकर आने वाली नदियों के नियंत्रण में कारगर तरीके से प्रयुक्त किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा है कि “इन विधियों और तकनीकों को केवल अस्थायी उपाय के तौर पर प्रयुक्त किया जा सकता है। लेकिन इसका स्थायी समाधान हमें कहीं और ढूंढना पड़ेगा।”
मैंने उनसे पूछा था कि नदियों की बाढ़ पर नियंत्रण की अपनी स्थायी योजना के बारे में मुझे समझाएँ। उन्होंने जो कुछ मुझे बताया वह इस प्रकार है :
“परमाणु विज्ञान के विकास से एक स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद जागी है। न्यूक्लियर फिशन नामक एक प्रक्रिया है जिसके प्रयोग से दुःखदायी नदी पर नियंत्रण किया जा सकता है, उन्हें शान्त किया जा सकता है, हमारी इच्छानुसार साधा जा सकता है और उससे अपना प्रयोजन सिद्ध किया जा सकता है। इस विधि का अनुप्रयोग वे लोग आसानी से समझ सकते हैं जिन्होंने न्यूट्रॉन्स के प्रक्षेप पथ पर संतृप्तता, विद्युत धारा और विच्छेदक विसर्जन एवं संघनन संबंधी ओह्म के नियम पर कार्य किया हो।
“ओह्म का नियम किस प्रकार कार्य करता है और परमाणु विज्ञान से इसका क्या संबंध है?
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परमाणु-भौतिकी वैज्ञानिक ही इसका पूरा उत्तर दे सकता है। आज परमाणु रिएक्टरों द्वारा न्यूट्रॉन की धाराएं उत्पन्न करना संभव है। न्यूट्रॉन की इन धाराओं को नदी की गहराइयों में प्रविष्ट करके जलस्तर और जलग्रहण क्षेत्रों को नियंत्रित किया जा सकता है। इस प्रकार बाढ़ का प्रवाह हमारी सिंचाई और विद्युत परियोजनाओं