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की जरूरतों को पूरा करने के लिए नियंत्रित और विनियमित किया जा सकता है। बाढ़ का शेष जल शीघ्र वाष्पीकृत हो जाता है।
यह पूछा जा सकता है कि द्रव्य के मूल कण के रूप में न्यूट्रॉन इतने प्रभावी क्यों हैं? इसका उत्तर सरल है। न्यूट्रॉन में कोई विद्युत आवेश नहीं होता। परमाणु नाभिक के चारों ओर घूमते इलेक्ट्रॉनों के ऋणावेश से अप्रभावित रहते हुए न्यूट्रॉन नदी की गहराइयों में आसानी से समा जाते हैं और हमारी इच्छानुसार कुछ घंटों में न सही, लेकिन कुछ ही दिनों में गाद और रेत का खनन करके और नदी तल को खुरच कर समस्त सामग्री नदी के दोनों तटों पर या समुद्र में डाल सकते हैं। इस प्रक्रिया से प्रक्षेप पथ पर आने वाला नदी तल और नदी के तट मजबूत बन जाते हैं।”
बाढ़ की समस्या बार-बार उत्पन्न होने वाली समस्या है और इससे ज्यादा विनाशकारी बल कोई दूसरा नहीं है। इस समस्या के समाधान में सरकार को केवल अपने अधिकारियों के ज्ञान और वैज्ञानिक जानकारी पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए।
किसी भी क्षेत्र से आने वाले सुझाव का स्वागत करना और उसके गुण-दोषों की जांच करना उनका कर्त्तव्य है। अधिक से अधिक प्रस्ताव आने पर ही सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।” ख्1,
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1 द टाइम्स ऑफ इंडिया, दिनांक 18 जनवरी, 1955