108 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
38
अखण्ड विशालकाय राज्यों के निर्माण का प्रबल विरोध
| v | [k | .M |
|---|
| fo | 'k | ky | d | k | ; |
|---|
| fu | ekZ |
|---|
| d | k |
|---|
| i | zc | y |
|---|
| fo | jksèk |
|---|
भाषाई आधार पर राज्यों के निर्माण के संबंध में डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने पं. जवाहर लाल नेहरू को एक तार भेजा था। तार इस प्रकार है : सम्पादक।
17.1.1956 तार
पंडित जवाहरलाल नेहरू
नई दिल्ली
खेद है कि संसद में उपस्थित रहने में असमर्थ हूं, डॉक्टरों ने मेरे यात्रा करने पर आपत्ति की है। भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के मुद्दे पर संसद में अपने विचार रखना चाहता था। ऐसा करने में असमर्थ होने के कारण इस तार द्वारा अपने विचार आप तक पहुंचा रहा हूँ। मैं अपने संघ की ओर से बोल रहा हूँ। संघ चाहता है कि बम्बई महाराष्ट्र में जाए, लेकिन मैं बम्बई को अलग राज्य बनाने के विरोध में भी नहीं हूँ। लेकिन मैं उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र जैसे अखण्ड विशालकाय राज्य बनाने का प्रबल विरोधी हूँ। फेडरेशन चाहता है कि इन राज्यों से केवल केन्द्रीय सरकार को भारी खतरा नहीं होगा बल्कि अल्पसंख्यकों और अनुसचित जातियों को भी भारी खतरा होगा। फेडरेशन चाहता है कि उत्तर प्रदेश, बिहार को तीन राज्यों में बाँटा जाए। महाराष्ट्र को भी तीन राज्यों में बाँट दिया जाए। ऐसे राज्य के तत्वावधान में अनुसूचित जातियों को कोई संरक्षण नहीं मिलेगा जहां बहुमत अनुसूचित जातियों को मनुष्य मानने के लिए तैयार नहीं है। मेरा आपसे अनुरोध है कि इस प्रश्न पर गंभीरता से विचार करें। मुझे डर है कि इसके परिणाम बहुत गंभीर होंगे। अनुसूचित जातियों के पास अब कोई राजनीतिक संरक्षण नहीं है। निराशा की स्थिति में वे हिंसा पर उतारू हो सकते हैं।
अम्बेडकर ख्1,
1 खैरमोडे, खण्ड 10 पृष्ठ सं. 56-57 ***